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नई पेंशन योजना बनी सरकार का सिरदर्द

प्रदेश में पहली अप्रैल 2005 से लागू नई पेंशन योजना राय सरकार के साथ ही करीब 60 हजार नए कर्मचारियों, अधिकारियों और शिक्षकों के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। करीब सवा तीन साल बीत गए, लेकिन इस अवधि में भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि या पेंशन के मद में धनराशि की कटौती नहीं की जा रही है।ड्ढr नई पेंशन योजना में नए कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय पुराने कर्मचारियों की तरह पेंशन और पारिवारिक पेंशन के घोषित लाभ नहीं मिलेंगे। इस योना में नए कर्मचारियों से वेतन और महँगाई भत्ते का 10 फीसदी अंशदान लिया जाना था। इतना ही अंशदान सेवायोजक यानी राय सरकार अथवा संबंधित स्वायत्तशासी संस्थानिजी शिक्षण संस्था द्वारा किया जाना था, लेकिन पहली अप्रैल 2005 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन से अंशदान की राशि अब तक नहीं काटी गई। न ही सेवायोजक ने अपना अंशदान कहीं अलग खाते में जमा किया।ड्ढr केन्द्र सरकार ने वर्ष 2004 में नई पेंशन योजना लागू की थी। उसने नई पेंशन योजना की निधि के लिए अलग से खाते तक खुलवा दिए और निधि के निवेश के लिए हाल में फण्ड मैनेजर भी नियुक्त कर दिए, लेकिन राय सरकार ऊहापोह में रही। अब वह नई पेंशन योजना पर अमल करना शुरू करती है, तो करीब सवा तीन साल के दौरान भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन से बकाए अंशदान की बड़ी राशि वसूलनी पड़ेगी, जो कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर सकता है। शासन भी मानता है कि नई पेंशन योजना की प्रक्रिया में विलम्ब से पेचीदगियाँ बढ़ीं हैं। सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग इस योजना के दायर में आने वाले कर्मचारियों से बकाए अंशदान की एक मुश्त धनराशि वेतन से काटने के बजाय कई किस्तों में धनराशि वसूलने की तैयारी कर रहा है। इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।ड्ढr सरकार भी मानती है कि नई पेंशन योजना में उसे कर्मचारियों के अंशदान की राशि के बराबर कई सौ करोड़ रुपए का अपना अंशदान भी अलग खाते में जमा कर निधि बनानी पड़ेगी। उसके बाद निधि की आधी राशि के निवेश के लिए केन्द्र सरकार की तर्ज पर फण्ड मैनेजर भी नियुक्त करने होंगे। यदि फण्ड मैनेजर अच्छे हुए तो भविष्य निधि और पेंशन की पुरानी स्कीम की तुलना में नए कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति के समय भविष्य के नाम पर अच्छी धनराशि भी मिल सकती है।

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