अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक

ब्यूरोक्रसी के खेल निराले हैं। किस्सागोई हजार। झारखंड में तो अक्सर यह उम्मीदों के उलट ही काम करती है। इसकी सुस्त रफ्तार आपको कभी झल्ला देगी, तो अचानक रस हो आपको चौंकायेगी भी यह। धूल फांकती फाइलें कब फर्राटा भरने लग जायें, कहना मुश्किल। ऐसा ही हुआ पेयजल और स्वच्छता विभाग के चीफ इंजीनियर के साथ। दो साल पुराने एक मामले में सुबह में इन्हें सजा हुई। शाम में इंजीनियर इन चीफ बना दिये गये। और सुनिये। साहब इसी 30 को रिटायर भी होनेवाले हैं। विकास की धुरी होते हैं इंजीनियर। दागी को और वह भी हफ्ते भर के लिए विभाग का प्रमुख बनाने के पीछे आखिर क्या मजबूरियां थीं? सरकार में बैठे लोगों के इस उतावलेपन की पूरी कहानी सामने आनी चाहिए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: दो टूक