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पर्याप्त सबूत फिर भी प्राथमिकी दर्ज नहीं

मध्यमा परीक्षा परिणाम घोटाले में अध्यक्ष, तत्कालीन व वर्तमान सचिव के खिलाफ पर्याप्त सबूत फिर भी निगरानी विभाग ने इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की है और ये बड़े घोटालेबाज आराम से घूम रहे हैं। स्पष्ट है कि बड़े पदाधिकारियों को बचाने की कोशिश जारी है जबकि हाल ही में इस परीक्षा घोटाला में दर्जनों छोटे अभियुक्तों को जेल जाना पड़ा।ड्ढr हालांकि रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। इधर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के एडीजी नीलमणि का कहना है कि इन अधिकारियों के खिलाफ अभी पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं और जांच जारी है।ड्ढr ड्ढr इस घोटाले जांच की सबसे मजेदार तथ्य यह है कि निगरानी जांच शुरू होने के पहले बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सह माध्यमिक शिक्षा निदेशक कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने निगरानी आयुक्त को जो दो पत्र लिखे थे जो काफी भ्रामक था। अध्यक्ष ने 16 जुलाई 2007 को पत्र में लिखा था कि एक्के -दुक्के मामले को छोड़कर परीक्षा परिणाम में कोई विशेष गड़बड़ी नहीं हुई है तथा विधिवत नियुक्त शिक्षकों के द्वारा ही उत्तरपुस्तिकाओ ं का मूल्यांकन कराया गया था। अध्यक्ष के अनुसार उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन 20 से 25 जून के बीच कराया गया लेकिन बोर्ड के रजिस्टर में परीक्षा परिणाम का प्रकाशन 2जून को दर्शाया गया है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि निगरानी जांच रिपोर्ट में अध्यक्ष की रिपोर्ट की पोल खुल गई और परीक्षा परिणाम में बड़े पैमाने पर घोटाले के मामले उजागर हुए। अब सवाल यह है कि जब इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा परिणाम में धांधली हुई थी फिर भी बोर्ड के अध्यक्ष ने कैसे इस मामल में हरी झंड़ी दे दी।ड्ढr ड्ढr निगरानी जांच रिपोर्ट में जिक्र है कि बोर्ड के अध्यक्ष, सचिव या परीक्षा विभाग ने अभी तक कोई ऐसी संचिका उपलब्ध नहीं कराई है जिससे यह पता चल सके कि 2007 का परीक्षा परिणाम किसके द्वारा, किस संचिका से, किस तिथि को व किन पदाधिकारियों के जांच के उपरांत किसके आदेश से परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन सचिव बसंत कुमार सिंह ने संस्कृत बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार करने व कराने के उद्येश्य से सहायक चन्द्रभूषण झा को परीक्षा नियंत्रक बनाया था जबकि श्री झा इस पद के योग्य नहीं थे। छदम् परीक्षकों को नियुक्त कर राशि गबन की जानकारी परिणाम घोषित होने के पूर्व बोर्ड के अध्यक्ष व सचिव को थी। बिना कार्य किए हुए ही वर्तमान सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी की संलिप्तता से राशि का भुगतान किया गया।

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