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सूबे में कई संगठनों ने काला दिवस मनाया

संपूर्ण क्रांति आंदोलन धारा से जुड़े अनेक संगठनों ने 25 जून को जहां राज्य भर में काला दिवस के रूप में मनाया वहीं संघर्ष वाहिनी मित्र मिलन की राष्ट्रीय संचालन समिति की चल रही दो दिवसीय बैठक के प्रथम दिन देश भर में तानाशाही विरोधी अभियान चलाने का फैसला किया गया।ड्ढr ड्ढr बैठक में प्रस्ताव पारित कर कहा गया देश में अघोषित आपातकाल आज भी जारी है और यही कारण है सत्ता के अधिकारों और दमन की ताकत से देश पर एक ऐसी अर्थ-व्यवस्था थोपी जा रही है जिससे गरीबों का रोजगार और उसकी जमीन भी उसके हाथ से निकलती जा रही है। इसका सबसे विभत्स चेहरा नंदीग्राम, सिंगूर तथा उत्तरकाशी में सामने आया है। बैठक को संबोधित करते हुए संघर्ष वाहिनी के पूर्व संयोजक अनिल प्रकाश ने कहा कि मौजूदा सरकार न तो मंहगाई पर काबू पा रही और न ही रोजगार के अवसर बढ़ा पा रही है।ड्ढr ड्ढr रोजगार गारंटी योजना की केवल कागजी खानापूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सच यह है कि आज लोकतंत्र ही खतर में है। उन्होंने कहा कि वाहिनी सहित सभी लोकतांत्रिक पर्वितनकारी धारा को एक जुट होकर अपनी निर्णयकारी भूमिका तय करनी होगी। बोधगया आंदोलन के प्रमुख नेता रहे कारू ने कहा कि संपूर्ण क्रांति आंदोलन की धारा में जब दलितों और पिछड़ों के समावेश की प्रक्रिया तेज हुई तो देश में आपातकाल थोप दिया गया। बिहार आंदोलन में झारखंड के प्रमुख नेता रहे घनश्याम ने कहा कि देश पर आज भी अघोषित आपातकाल जारी है। हम डब्लूटीओ जैसी अन्तर्राष्ट्रीय तानाशाही शक्ितयों के शिकार हो चुके हैं। बैठक को सम्बोधित करने वालों में संघर्ष वाहिनी के पूर्व संयोजक अरविंद कुमार, अरुण दास,प्रकाश नारायण, रंजीत, आशालता, विश्वनाथ बागी, राजेन्द्र, पंकज, मोहन मुकुल, निर्मल तथा महात्मा भाई आदि थे।

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