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राजरंग

या करते, आचार संहिता जो लागू है- बीरू, बोकारो आज हमारी बारीसबको देखा बारी-बारी, आज हमारी बारी. .। यही कहना है वोटरों का। पिछले एक महीना से सबको सुनते-सुनते लोगों के कान पक गये। सबने आश्वासन दिया, एक से बढ॥कर एक। कोई सस्ता चावल और गेहूं देने का आश्वासन दे रहा है, तो कोई सस्ता कंप्यूटर। कोई कह रहा है कि टैक्स नहीं देना होगा, तो कोई कुछ और फ्री में शिक्षा मिलेगी.। आसमान से भी ऊंचे आश्वासन। समुद्र से ज्यादा गहरे वादे। होना जाना तो कुछ है नहीं। पब्लिक तो सभे कुछ जानती है। असली फैसला का वक्त तो बुझिये यही है। पांच साल में एक बार मौका मिलता है पब्लिक को। पब्लिक इसी समय किंग होती है। बाकी समय में पब्लिक का जो हाल होता है, इ तो सबको पता है। पब्लिक खाली पब्लिक नहीं है, वोटर ही नय है। उ तो देश की असली मालिक है। उसके एक-एक वोट से देश की किस्मत बनेगी और बिगड़ेगी। बनाना और बिगाड़ना पब्लिक के हाथ में है। इसलिए आज पब्लिक की बारी है।

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