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नए सहयोगियों की तलाश में जुटी कांग्रेस

परमाणु करार के मुद्दे पर केंद्र की कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) और उसे बाहर से समर्थन दे रही वामदलों के रिश्तों में तेज होती कड़वाहट के बावजूद सरकार ने दावा किया है कि उसकी स्थिरता को कोई खतरा नहीं है। इसके साथ ही सभी प्रकार की परिस्थितियों से निपटने के लिए कांग्रेस ने संप्रग के घटक दलों से मंत्रणनाओं का दौर भी शुरू कर दिया है। करार पर बुधवार को संपन्न हुई बेनतीजा बैठक के बाद गुरुवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, ‘‘कैबिनेट समिति की बैठक में परमाणु करार के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।’’ चव्हाण आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। ज्ञात हो कि वामदलों ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु करार के मसले पर सरकार अपने कदम आगे बढ़ाती है तो वे समर्थन वापस ले लेंगे। लोकसभा में वामदलों के कुल 61 सदस्य हैं। ऐसे में जब कांग्रेस और वाम दलों का समीकरण बिखरता नजर आ रहा है, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नए सियासी समीकरणों की गुंजाइश तलाशनी शुरू कर दी है। सोनिया और उनके सिपहसालार वाम दलों द्वारा समर्थन वापस लिए जाने की संभावना को देखते हुए कुछ ऐसे दलों का समर्थन हासिल करने की गुंजाइश तलाश रहे हैं जिनसे या तो दूरी रही है या जो कांग्रेस के प्रति उदासीन रहे हैं। सोनिया गांधी भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर रुख तय करने के लिए गुरुवार को सहयोगी दलों के नेताआें से मिलने वाली हैं। सरकार को बचाए रखने, समय पूर्व चुनाव से बचने और करार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस के सामने 271 सांसदों का जादुई आंकड़ा बनाए रखने की चुनौती है। कांग्रेस और हाल तक उससे शीतयुद्ध में उलझे रहने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच दूरियां घटने की चर्चा है। सपा के लोकसभा में 3सदस्य हैं। कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि सपा का समर्थन लिया जा सकता है। लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कांग्रेसी नेताओं के मुताबिक सपा ने सरकार को समर्थन देने के संबंध में पहले ही अपनी इच्छा जाहिर की है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेताआें ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के जद (सेक्युलर), अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) से बातचीत शुरू कर दी है। ज्ञात हो कि जद (सेक्यूलर) के तीन, रालोद के तीन और टीआरएस के भी तीन सांसद हैं।

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