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नई उर्वरक नीति को हरी झंडी

आसमान छूती महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी के हंगामे के बीच यूपीए सरकार ने फिलहाल किसानों हितों पर फोकस किया है। चुनावों की सरगर्मियों के बीच सरकार ने जहां एक ओर किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज मुहैया कराने का रास्ता साफ कर दिया है, वहीं उनके उत्पादों की मार्केटिंग और मृदा संरक्षण के लिए भी प्रभावी इंतजाम करने की दिशा में कदम उठाया है। साथ ही डीएपी खाद की जगह अब देश में पहली बार नई और सस्ती खाद टीएसपी का इस्तेमाल भी शुरू करने का फैसला किया गया है। ये फैसले प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति सीसीईए की बैठक में लिए गये। कार्मिक राज्य मंत्री पृथ्वी राज चौहान ने बताया कि कैबिनेट ने बीज विधेयक 2004 को हरी झंडी दे दी है। इसका मकसद किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराना है ताकि उनका उत्पादन बढ़ाया जा सके। बीज उतपादन में निजी क्षेत्र की कंपनियों की सहभागिता स्थापित की जाएगी और बीजों का आयात उदार बनाया जाएगा। सीसीईए ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत एग्रीकल्चर मार्केटिंग इनफ्रास्ट्रक्चर, ग्रेडिंग एंड स्टैंडर्डाक्षेशन स्कीम को आगे जारी रखने को हरी झंडी देते इसे और भी प्रभावी बनाने का इंतजाम किया है। इस पर 706.40 करोड़ रुपये की लागत आएगी। कृषि उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग सुविधायें स्थापित करने के लिए सरकारी निवेश के साथ ही निजी और सहकारिता निवेश को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि उत्पादों के उचित रखरखाव के लिए 11वीं पंचवषीय योजना अवधि के दौरान 450 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में गोदामों के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए पूंजी सब्सिडी योजना के तहत खर्च की जाएगी। सीसीईए ने विनियंत्रित फॉस्फेटिक एंड पोटैसिक पी एंड के उर्वरकों की नई रियायत स्कीम को हरी झंडी दी है। पुरानी स्कीम 31 मार्च, 2008 से समाप्त हो गई थी, इसलिए नई स्कीम को पहली अप्रैल, 2008 से प्रभावी बनाया गया है। यह स्कीम डीएपी, एमओपी, एमएपी और काप्लेक्स उर्वरकों की 11 श्रेणियों के लिए है। नई स्कीम को इस प्रकार डिााइन किया गया है कि इससे देश में इन उर्वरकों का उत्पादन और कच्चे माल के आयात को बढ़ावा मिल सकेगा, वहीं दूसरी ओर सरकार ने इसके जरिए 1163.7रोड़ रुपये की सब्सिडी बचाने का भी रास्ता साफ कर लिया है। नई स्कीम से इन खादों के मूल्यों में कोई अंतर नहीं आएगा। डीएपी की जगह देश में पहली बार सस्ती आयातित टीएसपी खाद को चलन में लाने के लिए कदम उठाया गया है।ड्ढr

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