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किसी आइएएस को मिली पहली बार सजा

चारा घोटाला में आठ आइएएस अधिकारियों और एक आइआरएस अधिकारी को अभियुक्त बनाया गया है। इनमें से श्रीपति नारायण दुबे पहले अधिकारी हैं, जिन्हें सजा सुनायी गयी है। घोटाले के एक अन्य आरोपी आइएएस झारखंड के परिवहन आयुक्त सजल चक्रवर्ती के संबंध में जुलाई के दूसर सप्ताह में फैसला आ सकता है। चारा घोटाला के 53 मामलों की सुनवाई झारखंड में शुरू हुई। इनमें से 27 मामलों में फैसला सुनाया जा चुका है। शेष 26 में ट्रायल जारी है। जिन आइएएस अफसरों को अभियुक्त बनाया गया है उनमें बिहार के तत्कालीन पशुपालन सचिव बेक जुलियस, श्रमायुक्त के अरुमुगम, विज्ञान एवं प्रावैधिकी सचिव महेश प्रसाद, रांची के तत्कालीन क्षेत्रीय विकास आयुक्त एमसी सुवर्णो, पटना के तत्कालीन विकास आयुक्त फूलचंद सिंह, चाइबासा के तत्कालीन उपायुक्त सह झारखंड के परिवहन आयुक्त सजल चक्रवर्ती, संथालपरगना के पूर्व कमिश्नर एसएन दुबे और रांची के तत्कालीन आयकर आयुक्त एसी चौधरी हैं।ड्ढr अधिकांश अधिकारी कांड संख्या आरसी 20, आरसी-38, आरसी-47, आरसी-63, आरसी-64 और आरसी-68 में अभियुक्त बनाये गये हैं। एमसी सुवर्णो को सिर्फ आरसी-47 और 38 में, एसएन दुबे को 38 और 3में और सजल चक्रवर्ती को 20, 51 और 68 में आरोपी बनाया गया है। सजा सुनते ही नजरं झुका ली पूर्व कमिश्नर ने सीबीआइ के स्पेशल जज संजय प्रसाद ने 26 जून को पूर्वाह्न 11.35 बजे संथालपरगना के पूर्व कमिश्नर श्रीपति नारायण दुबे को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनायी। सफेद रंग की हाफशर्ट पहने और चश्मा लगाये दुबे ने सजा सुनते ही नजरं झुका ली। थोड़ी ही देर बाद वह अदालत कक्ष से बाहर निकले। वहां प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों ने उन्हें घेर लिया। दुबे के आगे-आगे उनके एक शुभचिंतक चल रहे थे, जो उन्हें मीडियावालों के कैमर से बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे थे। दुबे सिर नीचे किये हुए ग्राउंड फ्लोर पहुंचे, जहां से उन्हें हाजत ले जाया गया। सीबीआइ कोर्ट में गुरुवार को पूर्व कमिश्नर को सुनायी गयी सजा की ही चर्चा हो रही थी।ड्ढr कुल 287 अभियुक्तड्ढr चारा घोटाला के 53 मामलों को एकीकृत बिहार से सुनवाई के लिए झारखंड स्थानांतरित किया गया। इनमें कुल 287 अभियुक्त हैं, जिसमें से लगभग एक दर्जन की मौत हो चुकी है। अभियुक्तों में 11 राजनीतिज्ञ, नौ आइएएस और आइआरएस, 75 कोषागार के पदाधिकारी और कर्मचारी और 1पशुपालन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी हैं। मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए हाइकोर्ट के आदेश पर रांची सिविल कोर्ट में अलग से सात न्यायालयों की स्थापना की गयी। वहां प्रतिदिन ट्रायल जारी है। यही कारण है कि अब तक 27 मामलों में फैसला सुनाया जा चुका है। अधिकांश मामलों में एकाध अभियुक्तों को छोड़कर शेष सभी को सजा सुनायी गयी है। ं

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  • Web Title: किसी आइएएस को मिली पहली बार सजा