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ब्लैक लिस्टेड फिर छापेंगे स्कूली किताबें

एड्स शिक्षा के नाम पर अश्लील सामग्री परोसने वाले प्रकाशकों को इस साल भी स्कूली किताबें छापने की क्षाात मिल गई है। इस मामले में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती न देने का फैसला किया है। शासन के इस रवैए से नाराा एड्स शिक्षा के प्रकरण कीोाँच कर रही विधान परिषद की समिति ने पूर मामले की रिपोर्ट तलब की है।ड्ढr माध्यमिक स्कूलों में एड्स शिक्षा के बहाने पाठय़पुस्तकों में अश्लील सामग्री छापी गई थी। इसे लेकर विधानमंडल मेंोमकर हंगामा हुआ। पाठय़पुस्तकों से विवादित पाठ हटाए गए और कुछ छोटे अधिकारियों को दंडित भी किया। विधान परिषद की समिति ने ये सामग्री छापने वाले तीन प्रकाशकों शिवलाल अग्रवाल आगरा, रााीव प्रकाशन इलाहाबाद और विद्या भारती प्रकाशन मेरठ को काली सूची में डाल दिया था। समिति के इस फैसले के खिलाफ ये प्रकाशक हाईकोर्ट गए थे। प्रकाशकों का कहना था कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं। यूपी बोर्ड नेोो पाठय़क्रम प्रकाशकों को दिया उन्होंने वही छापा। हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इन प्रकाशकों को क्लीन चिट दे दी थी।ड्ढr सूत्र बताते हैं कि इस बार में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने न्याय विभाग से विधिक राय माँगी। न्याय विभाग ने साफ कहा था कि विभाग चाहे तो इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है। लेकिन हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के बााए विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन में पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षा की नई पाठय़पुस्तकें छापने का आदेशोारी कर दिया।ड्ढr सूत्र बताते हैं कि समिति के कई सदस्य विभाग के इस फैसले से नाखुश हैं। एड्स शिक्षा मामले में बनी विधान परिषद समिति की अगली बैठक 30ोून को है। समिति ने प्रकाशकों के मामले सेोुड़ी फाइल बैठक में तलब की है। समिति इस बिन्दु पर विचार करगी कि किन हालत में शासन ने इस गंभीर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने कीोरूरत न समझते हुए दागी प्रकाशकों को फिर से किताबें छापने का ठेका दे दिया।ड्ढr

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