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सिंथेटिक दूध पर रोक के लिए कसी लगाम

प्रदेश में दूध कम मिलने और नकली दूध की बढ़ती समस्या को ध्यान में रखते हुए निजी दुग्ध व्यवसाइयों के रजिस्ट्रशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अब दो लाख लीटर दूध प्रतिदिन से अधिक क्षमता वाली दुग्ध इकाइयों के रजिस्ट्रशन के लिए केंद्र सरकार को दिए जाने वाले अनापत्ति प्रमाण-पत्र भी नहीं भेजे जाएँगे।ड्ढr यह जानकारी पशुधन और दुग्ध राय मंत्री अवध पाल सिंह यादव ने दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 204 दुग्ध इकाइयों में से 10 इकाइयों का पंजीकरण राय स्तर पर और शेष 14 दुग्ध इकाइयों का पंजीकरण केंद्र सरकार के स्तर पर हुआ है। पंजीकृत कुल इकाइयों में से 28 इकाइयाँ सहकारी हैं और शेष प्राइवेट हैं। दस हजार से लेकर दो लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाली दुग्ध इ्रकाइयों का पंजीकरण राय सरकार स्तर पर और दो लाख लीटर से अधिक क्षमता वाली इकाइयों का पंजीकरण केंद्र सरकार के स्तर से होता है। पंजीकृत 204 इकाइयों को एक करोड़ 45 लाख 71 हजार लीटर दूध प्रतिदिन के लिए लाइसेंस जारी हुए थे। दूध की पचास फीसदी मात्रा का दुग्ध उत्पादक स्वयं इस्तेमाल कर लेता है। शेष पचास फीसदी का 65 फीसदी दूध हलवाइयों के पास चला जाता है और मात्र 35 फीसदी दूध ही फैक्टरियों और चिलिंग सेंटरों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दूध की इस कमी के चलते ही सिंथेटिक दूध का प्रचलन बढ़ा। इसलिए सरकार ने इसकी रोकथाम के प्रयास शुरू कर दिए हैं। आगे और सख्त कदम उठाए जाएँगे। श्री यादव ने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मात्र 15 दुग्ध इकाइयों को ही पंजीकृत कर 11 लाख 12 हजार लीटर दूध प्रतिदिन के लाइसेंस जारी किए गए हैं। यदि दूध की उपलब्धता के अनुरूप ही इकाइयों को पंजीकृत किया गया होता तो प्रदेश में सिंथेटिक दूध के निर्माण को बढ़ावा न मिलता।ड्ढr

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  • Web Title: सिंथेटिक दूध पर रोक के लिए कसी लगाम