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और इस काबिल अफसर के पास कोई काम नहीं है

अच्छे काम के लिए राष्ट्रपति से रात पदक पाने वाले दलित आईएएस अधिकारीोीआर बरुआ इन दिनों मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त हैं लेकिन करने के लिए उनके पास कोई काम नहीं। न उनके पास फाइलें आती हैं न वह अपने स्टेनों को डिक्टेशन देते हैं। आईपीएस की नौकरी छोड़ कर आईएएस में आने वाले श्री बरुआ को लगता है कि यहाँ उनकी प्रतिभा का हनन हो रहा है। निराश बरुआ आईएएस छोड़ना चाहते हैं। इस्तीफा भी सरकार को ो चुके हैं लेकिन सरकार तय नहीं कर पा रही है कि इस इस्तीफे का क्या कियाोाए?ड्ढr 1बैच के आईएएस बरुआ की कहानी इस सिस्टम की पोल खोलती है। 27 साल के कैरियर में वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 1में उन्हें राष्ट्रपति ने रात पदक दिया। फिर 1में रायपाल ने उन्हेंोालौन के डीएम के रूप में अच्छा काम करने के लिए स्वर्ण पदक दिया। वह हमेशा महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनके दुर्दिन मुलायम सरकार में उस वक्त शुरू हुएोब तत्कालीन मंत्री की कोई बात मानने से उन्होंने इनकार कर दिया। प्रमुख सचिव परिवहन से हटाकर उन्हें चार महीने के लिए प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया।ड्ढr बाद में उन्हें विकास अन्वेषण एवं प्रयोग प्रभाग का निदेशक बना दिया गया। प्रमुख सचिव स्तर का अधिकारी होने केबावाूद निदेशक पद पर बने रहने से आहत श्री बरुआ ने तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेने का आग्रह किया। तत्कालीन मुख्य सचिव पीके मिश्र ने श्री बरुआ का इस्तीफा अस्वीकार करते हुए उन्हें प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त के पद पर तैनात कर दिया।ड्ढr पहले संस्थागत वित्त के साथ कर-निबंधन विभाग भीोुड़ा था। बाद में कर निबंधन अलग कर दिया गया। बिक्री कर, मनोरांन कर और स्टाम्प डय़ूटी सेोुड़े काम कर निबंधन के साथ चले गए। इसका प्रमुख सचिव भी अलग हो गया। अब संस्थागत वित्त के पास कोई काम नहीं बचा है। प्रमुख सचिव सिर्फ बैंकिंग का काम देखते हैं। महीने में दो चार फाइलें आ गईं तो गनीमत है वर्ना उनके पास करने को कुछ नहीं।ड्ढr नए विभाग में भी सात महीने खाली बैठे रहने से दुखी श्री बरुआ ने बीती एक मार्च को एक और इस्तीफा मुख्य सचिव को ो दिया। इसमें उन्होंने लिखा-‘पूर्व की भाँति इस महत्वहीन पद पर भी मेर पास कोई काम नहीं। मेरी प्रतिभा का हनन हो रहा है। मैं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहा हूँ और व्यथित हूँ।’ श्री बरुआ ने स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति माँगते हुए अपने को कार्यमुक्त करने की अपील की।ड्ढr लेकिन इस पत्र पर शासन चुप होकर बैठ गया। इस बार में ‘हिन्दुस्तान’ नेोब श्री बरुआ से पूछा तो उन्होंने इस प्रकरण में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। इस संवाददाता ने सचिव नियुक्ित डा.अनूपचंद पाण्डेय से पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बार में वह चेक करने के बाद कुछ बता पाएँगे। कुछ घंटे बाद श्री पाण्डेय ने बताया कि श्री बरुआ ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। इस्तीफा कब वापस लिया? इसकेोवाब में श्री पाण्डेय ने कहा कि यह आप उनसे खुद पूछ लीािए। संवाददाता ने श्री बरुआ से बात करनी चाही तो वह फोन पर उपलब्ध नहीं हुए।ड्ढr

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