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फर्जीप्रमाणपत्र पर लिया लाखों का ठेका

बिजली बोर्ड में फर्जी आवास प्रमाण पत्र के आधार पर लाखों रुपए का ठेका लेने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में कनीय अधिकारियों द्वारा बोर्ड के बड़े अधिकारियों को भी अंधेर में रखा गया। यही नहीं यह ठेका ऐसे व्यक्ित को दिया गया है, जिसे कायदे से बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित किया जाना चाहिए था, क्योंकि पूर्व में उसके द्वारा छोटे-मोटे कार्य भी पूर नहीं किए गए हैं। बोर्ड प्रबंधन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।ड्ढr ड्ढr बिजली बोर्ड ने माधोपुर पोल इकाई में बिजली के 4 हजार खंभे बनाने का ठेका ऐसे व्यक्ित को दे दिया है, जिसने स्थानीय होने का फर्जी प्रमाण पत्र बोर्ड को सौंपा है।उक्त व्यक्ित ने मझौलिया (पश्चिम चम्पारण) के बीडीओ का ‘आवासीय प्रमाण पत्र’ संख्या 1217, दिनांक-5.10.2007 जमा किया। इसी आधार पर उसे स्थानीय होने का लाभ मिला और अयोग्य होने के बावजूद काम मिल गया। जबकि मझौलिया बीडीओ ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में बताया कि1217 संख्या से ‘निवास प्रमाण पत्र’ जारी किया गया है और वह संबंधित ठेकेदार का नहीं बल्कि वहां के दूसर व्यक्ित का निकला। यह प्रमाण पत्र 14.06.2007 को जारी किया गया है। फर्जी प्रमाण पत्र में थोड़ी जानकारी दी गई है जिससे लगता है आनन-फानन में उसे तैयार किया गया है, जबकि असली प्रमाण पत्र में असली व्यक्ित की विस्तार से जानकारी है। बिजली बोर्ड ने जिस व्यक्ित को स्थानीय होने के आधार पर यह काम सौंपा है उसका रिकार्ड बेहद खराब है। सुगौली पावर सब स्टेशन की चहारदिवारी कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उसके द्वारा नहीं बनायी गयी जिससे बोर्ड ने उसकी जमानत राशि जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू की है, बावजूद इसके वैसे व्यक्ित को ही ठेका देना कई संदेहों कोड्ढr जन्म देता है।

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