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दिनोंदिन बढ़ रही है बाल श्रमिकों की संख्या

बिहार के छोटे बच्चे आज देश के सभी बड़े शहरों में बाल मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जब से कुछ दलालों बिहार के बच्चों को दूसर राज्यों में भेजना शुरू कर दिया है तब से बाल श्रमिकों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। सबसे दु:ख की बात यह है कि मां-बाप यह सोचते हैं कि यदि बच्चा कुछ कमाएगा तो गरीबी कुछ दूर होगी, लेकिन वे भूल जाते हैं कि बच्चा शिक्षा से वंचित हो रहा है और अपने अंगों को खराब कर रहा है।ड्ढr ड्ढr उक्त बातें ग्लोबल मार्च अगेन्स्ट चाइल्ड लेबर और ग्लोबल कैम्पेन फॉर एजुकेशन के अध्यक्ष कैलाश सत्यार्थी ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहीं। इस मौके पर बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद भी उपस्थित थे।श्री सत्यार्थी ने कहा कि विश्व में लगभग 21 करोड़ बाल मजदूर हैं और दूसरी ओर लगभग 1रोड़ लोग बेरोगार हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बड़े लोगों का काम कम पैसे में छोटे बच्चे कर रहे हैं। बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद ने बताया कि जब तक समेकित प्रयास नहीं किया जाएगा तब तक बाल श्रमिकों की संख्या में कमी नहीं होगी। सरकार को चाहिए कि श्रम, शिक्षा, कल्याण, स्वास्थ्य एवं स्वयंसेवी संस्थान मिलकर इसपर कार्य करं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना के तहत केन्द्र सरकार प्रतिवर्ष 15 करोड़ रुपए देती है लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस पैसे का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार में 1400 विद्यालय स्वीकृत हैं जिसमें 1100 विद्यालय चल रहे हैं परंतु इन विद्यालयों की स्थिति क्या है इस संबंध में बोलने की जरूरत नहीं है।

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