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मातृभाषा बोलने में हिचक कैसी

लेबनान में पली-बढ़ीं सुजैन टॉलहक सामाजिक कार्यकर्ता और कवि हैं। उन्होंने अरबी भाषा को बचाने के लिए अभियान चलाया है। उन्होंने फील अमेर नाम का संगठन बनाया है, जो लेबनान के लोगों को अरबी भाषा के बारे में जागरूक करता है। पेश हैं उनके एक भाषण के अंश-

वेटर का व्यवहार
कुछ दिनों पहले की बात है। मैं एक रेस्टोरेंट में अपनी दोस्त के साथ बैठी थी। मैंने वेटर को बुलाया और अरबी भाषा में उससे मेन्यू कार्ड लाने को कहा। वेटर ने मुझे इस तरह घूरकर देखा, मानो मैंने कुछ गलत कह दिया हो। उसने अंग्रेजी में सॉरी कहा। मैंने फिर अरबी भाषा में वेटर से वह कार्ड लाने को कहा, जिसमें वहां खाने-पीने की चीजों का ब्योरा होता है। इस बार वेटर नाराज हो गया। उसने कहा, क्या आपको पता नहीं है कि इसे अंग्रेजी में मेन्यू कहते हैं? आइंदा ध्यान रखना। उसके व्यवहार से साफ था कि उसे मेरा अरबी भाषा में बात करना पसंद नहीं आया। शायद उसकी नजरों में मैं बेहद पिछड़ी हुई और अनपढ़ महिला थी। मुझे वेटर का व्यवहार अच्छा नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा, अगर मैं अपने ही देश में अपनी मातृभाषा नहीं बोल सकती, तो कहां बोलूंगी? क्या खुद को मॉडर्न दिखाने के लिए अंग्रेजी बोलना जरूरी है? तो क्या आधुनिक समाज में शामिल होने के लिए मैं अपनी संस्कृति और भाषा भूल जाऊं? अगर मेरे देश के सारे लोग ऐसा ही करने लगे, तो क्या होगा? वे तो अपनी जड़ों से दूर हो जाएंगे। क्या खुद को सभ्य और आधुनिक साबित करने के लिए हमें इतनी बड़ी कीमत चुकानी होगी? हमारे जेहन में बचपन की यादें सबसे खूबसूरत होती हैं। तो क्या जो कुछ मैंने बचपन में अरबी में पढ़ा और सुना था, अब उसे भूल जाऊं?

तमाम सवाल
मातृभाषा को लेकर ढेर सारे सवाल मेरे मन को झझकोर रहे थे। मैं मानती हूं कि अरबी भाषा आज के जमाने की जरूरतों को पूरा नहीं करती। आधुनिक शोध और विज्ञान में इस भाषा का इस्तेमाल नहीं होता। विदेश यात्राओं के दौरान हम अरबी नहीं बोल सकते। अरबी बोलने पर एयरपोर्ट पर हमारे कपड़े उतरवाकर तलाशी हो सकती है। तो हम कहां और कब अरबी भाषा में बात कर सकते हैं? अरबी हमारी मातृभाषा है और एक्सपर्ट कहते हैं कि किसी दूसरी भाषा में महारत हासिल करने के लिए आपको अपनी मातृभाषा का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। अगर आपको अपनी मातृभाषा का ज्ञान नहीं होता, तो आप विदेशी भाषा कैसे बोल पाएंगे? महान लेबनानी लेखक और कवि खलिल जिब्रान ने अपने लेखन की शुरुआत अरबी में की थी और बाद में अंग्रेजी में लिखना शुरू किया। उनकी लेखनी, कल्पनाओं और दर्शन में आपको उनके गांव, वहां के पहाड़ों और वहां के माहौल की झलक मिलती है। इसका मतलब यह है कि  कोई इंसान अपनी संस्कृति और सभ्यता से अलग होकर अच्छा लेखक या कलाकार नहीं बन सकता।

भाषा की अहमियत
दूसरी अहम बात हमें इतिहास से सीखने को मिलती है कि किसी देश को बरबाद करना हो, तो सबसे पहले उसकी भाषा को खत्म कर दो। शायद जर्मनी, फ्रांस, जापान और चीन के समाज इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने अपनी मातृभाषा को कभी खत्म नहीं होने दिया। इन देशों ने अपनी मातृभाषा को बचाने के सभी संभव उपाय किए। ये देश अपनी भाषा को विकसित करने और इसकी रक्षा के लिए काफी पैसा खर्च करते हैं। यही नहीं तुर्की और मलयेशिया जैसे देश भी हैं, जिन्होंने अपनी मातृभाषा को बनाए रखने के लिए काफी मशक्कत की। अगर मैं आपके सामाने आजादी और प्रभुसत्ता जैसे शब्दों का इस्तेमाल करूं, तो आपके मन में क्या खयाल आता है? ये शब्द आपके मन में एक भावना पैदा करते हैं। ये शब्द हमारे जीवन के हालात को बयां करते हैं। ये खयाल सिर्फ मुंह से निकलने वाले शब्द नहीं हैं, बल्कि वे हमारी मानसिकता, हमारी समझ और हमारी भावनाओं को व्यक्त करने का बेहतरीन माध्यम हैं। भाषा सिर्फ कुछ शब्द भर नहीं, यह एक तरह का विचार है, जो बताता है कि हम कैसे सोचते हैं? हम कैसे रहते हैं? भाषा हमें एक-दूसरे को समझने में मदद करती है। यह सब सिर्फ मातृभाषा में संभव है।

हमारी कोशिश
हमने अरबी भाषा को बचाने के लिए क्या किया? हमने इस मामले को अपने देश में सिविल सोसाइटी के जरिये एक बड़ा मुद्दा बनाया। हमने अपनी मातृभाषा को बचाने का अभियान चलाया। कुछ लोगों ने हमसे कहा कि क्यों बेकार में समय बरबाद कर रही हो? जाओ, अपना काम करो, बेकार के झंझट में नहीं पड़ो। मगर हम डटे रहे। हमारा पहला अभियान काफी सफल रहा, इसके बाद हमने दूसरा अभियान शुरू किया। हमने लोगों से अपील की, अपनी मातृभाषा को नष्ट मत करो। यही हमारा नारा था। हमने लोगों को समझाया कि अगर हमारी मातृभाषा खत्म हो गई, तो हमारी पहचान खत्म हो जाएगी। पहचान खत्म हो गई, तो हमारा अस्तित्व ही सवाल बन जाएगा। फिर हमने अरबी भाषा में युवा लड़कों और लड़कियों के पोस्टर फोटो जारी किए। उन पोस्टरों में अरबी शब्दों के साथ अंग्रेजी शब्द कूल का इस्तेमाल किया गया था। कुछ लोगों ने कूल शब्द पर विरोध किया, क्योंकि यह अंग्रेजी में था। हमने कहा कि ऐसे अंग्रेजी शब्द, जिन्हें हम आसानी से  अरबी बोलचाल में शामिल कर सकते हैं, तो उसमें कोई बुराई नहीं है। जैसे इंटरनेट शब्द, यह अंग्रेजी का शब्द है, लेकिन हम इसे आसानी से अपने बोलचाल में शामिल कर सकते हैं। अन्यथा इंटरनेट के लिए हमें ऐसा ही आसान शब्द अरबी भाषा में खोजना होगा। मुझे लगता है कि यदि आप कुछ रचनात्मक काम करना चाहते हैं, तो इसके लिए मातृभाषा ही बेहतर माध्यम हो सकता है। मसलन, अगर आप कोई उपन्यास लिखना चाहते हैं या कोई शॉर्ट फिल्म बनाना चाहते हैं, तो अपनी मातृभाषा में काम करें। मातृभाषा में काम करने पर बेहतर से बेहतर खयाल आपके दिमाग में आएंगे। आइए, हम अपनी भाषा को बचाने का संकल्प लें।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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