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बालू के ढेर पर लिख डाली नारी की त्रासदी

बालू का बेजान ढेर। किसी भी मायने में सुंदर नहीं। लेकिन कलाकार की पारखी नजर व अंगुलियों के कमाल ने बालू के ढेर को भी दर्शनीय बना दिया है। पटना आर्ट कालेज के द्वितीय वर्ष के छात्र 22 वर्षीय अमृत प्रकाश ने गोलघर परिसर में रत के ढेर को सुंदर कलाकृति का रूप दे दिया है। इसे देखने लोगों की भीड़ लगी हुई है।ड्ढr ड्ढr गोलघर परिसर में बिखर लगभग बीस फीट चौड़ी व चार फीट ऊंचे बालू के ढेर पर पिछले दो दिनों से साहेबगंज(झारखंड) का अमृत अपनी अंगुलियां फिरा रहा है। दो दिनों की मेहनत रंग लायी और अब यह बोलती नजर आती है। कलाकार ने बालू के ढेर के जरिए नारी पर हो रहे अत्याचार की कहानी लिख डाली है। अमृत ने बताया कि उड़ीसा के सुदर्शन पटनायक ऐसे प्रयोग कर चुके हैं। इसके पहले अपने गृहजिले साहेबगंज में वह भी इसी तरह की कलाकृतियां बना चुका है। नारी पर रोज-ब-रोज अत्याचार की घटनाओं से आंदोलित अमृत ने अपनी कलाकृतियों में इसी विषय पर अपने जज्बातों को दर्शाया है। वह कहता है कि सतीप्रथा तो खत्म हो चुका है पर महिलाएं आज भी दहेज के लिए जलायी जा रही हैं। नारी को देवी कहा जाता है पर उसके साथ बलात्कार की घटनाएं होती हैं। बात-बात पर इनके साथ मारपीट की घटना होती है। उसने बालू के ढेर पर अपनी अंगुलियों व चाकू के सहार नारी की इन्हीं त्रासदियों को दिखलाने की कोशिश की है।

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