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फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जांच में पुलिस सुस्त

लखनऊ वरिष्ठ संवाददाता। डीएम के जाली दस्तखत से जारी तीन शस्त्र लाइसेंसों के मामले में पुलिस की जांच शून्य पर अटकी हुई है। एसएसपी को दो माह में दो बार पत्र लिखे जाने के बाद भी इस गंभीर प्रकरण में पुलिस अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है। सिटी मजिस्ट्रेट पीपी पाल की ओर से एसएसपी को इस मामले में तीसरा पत्र भेजा गया है।

पुलिस फर्जी लाइसेंस के सहारे कोयम्बटूर व दिल्ली में नौकरी पाने वाले तीनों शख्सों के घर के पते तक की तस्दीक नहीं कर सकी है। पुलिस से कोई रिपोर्ट न मिलने के कारण ही प्रशासन की ओर से अब तक दिल्ली को तीनों ही फर्जी शस्त्र लाइसेंस के बारे में कोई जवाब नहीं दिया जा सका है। इससे यह साबित होता है कि पुलिस व प्रशासन दोनों की ओर से फर्जी लाइसेंस बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है।

एटीएस के सतर्क करने पर भी पुलिस व प्रशासन गंभीर नहींडीएम के जाली दस्तखत, पुलिस की झूठी रिपोर्ट से गोमतीनगर निवासी मनोज विश्वकर्मा, कृष्णानगर निवासी सतवीर सिंह व वजीरगंज निवासी शवि कुमार पर अंतरराज्यीय लाइसेंस का खुलासा होने से सभी सन्न हैं। इससे एक बात फिर साबित होती है कि एटीएस (आतंक निरोधी दस्ता) के बार-बार सतर्क करने के बाद भी प्रशासन व पुलिस की ओर से लाइसेंस जारी करने में कोई सावधानी नहीं बरती जा रही है। एटीएस की ओर से कैसरबाग स्थित नेशनल गन हाउस व किसान गन हाउस से नक्सलियों को असलहे बेचने के मामले उजागर हो चुके हैं।

नेशनल गन हाउस के लाइसेंस को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। किसान गन हाउस पर भी ऐसी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इसके बावजूद पुलिस व प्रशासन की ओर से जालसाजों पर नकेल डालने के लिए कोई फुलप्रूफ उपाए नहीं किए गए।

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