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नहीं होंगे रेल हादसे, सुरक्षित पहुंचेंगे यात्री

अलीगढ़। मथुरा में टीपीडब्ल्यूडी (ट्रेन प्रोटेक्शन वाíनंग सिस्टम) का प्रयोग किया जा रहा है। अगर प्रयोग सफल रहता है तो जल्द ही अलीगढ़ में भी रेलवे ट्रैक पर डिवाइस लगाई जाएगी। डिवाइस लगने से यात्री सुरक्षित अपने गतंव्य पर पहुंच सकेंगे। डिवाइस से ट्रेनों के टकराने के हादसों पर भी रोक लगेगी।

यात्रियों को सुरक्षित गतंव्य तक पहुंचाने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से मथुरा में टीपीडब्ल्यूएस का प्रयोग किया जा रहा है। डिवाइस को ट्रैक पर लगाया जा रहा है। डिवाइस लगने से उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन आने पर चार सौ मीटर की दूरी पर ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएंगे। ट्रेन चालकों को ट्रेक पर दूसरी ट्रेन आने के संकेत ऑडियो-विज्युअल दिखाई देंगे। डिवाइस के माध्यम से ट्रेनों को आपस में टकराने से रोका जा सकेगा। यात्री सुरक्षित अपने गतंव्य तक पहुंच सकेंगे।

मथुरा में चल रहा प्रयोग अगर सफल रहता है तो जल्द ही अलीगढ़ में डिवाइस का प्रयोग किया जाएगा रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि 2014 तक अलीगढ़ में रेलवे ट्रैक पर डिवाइस लगा दी जाएगी। वहीं अब तक ट्रेन हादसों में हजारों यात्रियों ने अपनी जान से हाथ धो चुके हैं।

कब-कब हुए हादसेदो जनवरी 2010 को लिच्छवी एक्सप्रेस से हुए हादसे में ट्रेन चालक समेत दस लोगों को मौत की मौत हो गई थी। कानपुर स्टेशन पर गोरखधाम एक्सप्रेस और प्रयागराज एक्सप्रेस की भिडंम्त में पांच लोगों की मौत हुई व 40 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

16 जनवरी को आगरा में रेलवे अधिकारियों ने एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें दौड़ा दी थी। गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ। तीन जनवरी 2011 को गाजियाबाद जिले के दादरी क्षेत्र में मालगाड़ी से हादसा हुआ था। सात जुलाई 2011 को मथुरा-छपरा एक्सप्रेस से हुए हादसे में 38 लोग मारे गए थे। वहीं दस जुलाई को कालका मेल ने 70 लोगों को मौत के घाट उतारा था। 22 नवंबर को दून एक्सप्रेस ने दो बोगियों को क्षतिग्रस्त किया था, जिसमें सात लोग मारे गए थे।

31 मई 2012 को दून एक्सप्रेस ने उत्तर प्रदेश में 50 लोगों को घायल किया था।

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