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राजद और लोजपा के बीच गांठ बरकार

पटना। विशेष प्रतिनिधि। राजद और लोजपा गठबंधन पर खतरे की तलवार लटक रही है। खरमास में दोनों दलों के नेताओं के बीच छिड़े खरमंडल का पटाक्षेप होता नजर नहीं आ रहा है। लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान शुक्रवार को स्व. गुलाम सरवर की जयंती पर आयोजित यौम ए उर्दरू कार्यक्रम में पटना आए। इस मौके पर उन्होंने गठबंधन के सवाल को चतुराई से टाल दिया। श्री पासवान ने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस इस मुद्दे पर फैसला करेंगे।

उधर, श्री पारस ने गठबंधन के सवाल पर पूछने पर दो टूक कहा कि अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। खरमास के बाद ही फैसला किया जाएगा। लोजपा सुप्रीमो और उसके रणनीतिकार के इन बयानों से इतना तो साफ है ही कि राजद से गठबंधन बनाये रखने के फैसले पर लोजपा अडिग नहीं है। वह अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है। खासकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की मुलाकात के अगले दिन गठबंधन पर लोजपा के शीर्ष नेताओं की खामोशी के नहिितार्थ भी निकाले जा रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी ने गठबंधन के सवाल पर राजद सुप्रीमो को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। यानी अभी राजद का कांग्रेस से गठबंधन भी तय नहीं हुआ है। ऐसे में यूपीए वन को बिहार में फिर से आकार देने की कवायद फिलहाल सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। इस स्थिति में लोजपा वेट एंड वाच की रणनीति पर काम कर रही है। यूपीए वन को आकार देने की कोशिशों में भी वह तभी शामिल होगी, जब उसे अपेक्षित सीटें मिल जाए।

इसमें कई सीटें ऐसी भी हैं जिन पर राजद के दिग्ग्जों की नजर है। उधर, राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज हो चली है कि लोजपा की जदयू से अंदरखाते बातचीत चल रही है। हालांकि दोनों दल ऐसी किसी बातचीत से इनकार कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो लोजपा का एक बड़ा खेमा राजद से गठबंधन के खिलाफ है। उसका तर्क है कि राजद के साथ रहते पार्टी का विस्तार संभव नहीं है। पार्टी अगर अपना पांव फैलाना चाहती है तो उसे गठबंधन के नए विकल्पों पर सोचना चाहिए।

ऐसे में लोजपा- राजद रिश्ते में पड़ी गांठ फिलहल खुलती नजर नहीं आ रही है।

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