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जांच के फेर में फंसा टोला सेवकों का मानदेय

मुजफ्फरपुर। कार्यालय संवाददाता। तीन साल से अधिकारी जांच ही कर रहे हैं। एक अधिकारी की जांच रिपोर्ट को गलत साबित कर दूसरे अधिकारी नई रिपोर्ट दे देते हैं। वर्ष 2009 से यही सिलसिला चल रहा है। डीएम से लेकर डीईओ, डीपीओ तक गुहार लगा हम थक चुके हैं। अब अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। मानदेय भुगतान की मांग को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में धरना पर बैठे बंदरा के टोला सेवकों का आक्रोश फूट पड़ा।

सुरेन्द्र महतो, देवन रजक, रामवृक्ष सहनी, संजय कुमार, रंजीत कुमार समेत कई टोला सेवकों ने कहा कि लंबित मानदेय के भुगतान के लिए हम लगातार गुहार लगा रहे हैं। वर्ष 2009 से अब तक बस जांच का ही खेल चल रहा है। 56 केन्द्र में हर बार केन्द्र बंद होने और फिर केन्द्र खुलने की अलग-अलग जांच रिपोर्ट दी गई है। जो केन्द्र बंद थे, वहां के टोला सेवकों का भुगतान किया जा रहा है। पर काम करनेवालों का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

कई साल पहले काम छोड़ देनेवालों को भी मानदेय दिया जा रहा है। डीएम के आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी हमारा भुगतान नहीं कर रहे हैं। ‘मेरे सामने यह मामला अभी आया है। जांच के बाद टोला सेवकों का मानदेय भुगतान हर हाल में किया जाएगा। इस संबंध में संबंधित डीपीओ को भी निर्देश दे दिया गया है। ’ -मुस्तफा हुसैन मंसूरी, डीईओ।

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