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ट्रेन में आग की घटनाओं से मुसाफिर भयभीत

हिन्दुस्तान संवाद। ट्रेन में हो रही बर्निग की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। ट्रेन में यात्रा करने वालों के लिए परेशानी बढ़ती जा रही है। यात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। ट्रेनों को आग से बचाने की उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। इससे विभागीय लोगों में भी अपनी सुरक्षा के प्रति शंका है। 28 दिसंबर को बेंगलूर-नांदेड़ एक्सप्रेस में आग लगी। उसमें 26 जानें गई। 8 जनवरी को बांद्रा-देहरादून एक्सप्रेस की आग लगी।

घटना में 9 यात्रियों ने अपनी जानें गंवाई। इस तरह ट्रेनों के बर्निग रूप के बढ़ने से जनता ही नहीं अपितु विभागीय कर्मचारी भी चिंता में हैं। क्षेत्र के सीओडी, नैनी, इदारतगंज, जसरा, मदरहा, लोहगरा, शंकरगढ़ रेलवे स्टेशनों के कर्मचारी इन हादसों से सशंकित हैं लेकिन बोलने को तैयार नहीं हैं। नाम की गोपनीयता पर कर्मचारियों ने बताया कि रेलवे विभाग ने तीन साल पहले ट्रेनों में हो रही आग की घटनाओं को रोकने के लिए फायर एलार्म एंड डिटेक्शन सिस्टम की योजना को अंतिम रूप दिया था।

इस तकनीक को प्रयोग के तौर पर भुवनेश्वर राजधानी में लगाया भी गया पर उसके बाद योजना फाइलों तक ही सीमित रह गई। फायर एलार्म तकनीक लगने के बाद कोच में हल्का धुंआ उठने पर एलार्म बजने लगेगा। इससे रेलवे के कर्मचारी ट्रेन में बर्निग होने से पहले सजग हो जाएंगें। यदि कर्मचारी इसके बावजूद सजग नहीं होते और ट्रेन को बचाने का प्रयास नहीं करते तो चलती ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाएगी। ट्रेन रुक जाएगी और हूटर बजने लगेगा।

शासन की योजना थी कि फायर एलार्म एंड डिटेक्शन सिस्टम पहले वीआईपी ट्रेनों में लगेगा, उसके बाद अन्य ट्रेनों में। लेकिन ट्रेनों में यह सिस्टम लगने के बजाय तीन साल बीतने के बाद भी इस योजना को लागू नहीं किया गया। सूत्र के अनुसार योजना में लंबे चौड़े बजट की जरूरत थी। वीआईपी ट्रेनों में ही करोंड़ो खर्च हो जाता। समाज के बुद्धजीवियों शशीकांत मिश्र, ए पी सिंह, लल्लू प्रसाद त्रिपाठी, रतन केसरी का कहना है कि बर्निग ट्रेनों में जाने वाली जानों से अधिक इस पर खर्च नहीं आएगा।

सरकार को इस योजना को तत्काल लागू करना चाहिए। आग की गति अति तीव्र हैबर्निग ट्रेन के एक कोच में आग के फैलने में एक मिनट से भी कम समय लगता है। चलती ट्रेन में आग की गति 25 मीटर प्रति सेकंड होती है। यदि ट्रेन के एक कोच में आग लग गई तो वर्तमान व्यवस्था में कंट्रोल करना नामुमकिन हो जाता है। फायर एलार्म नंबर हैरेलवे सूत्रों के अनुसार ट्रेनों में बढ़ती आग की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग की ओर से एक फायर एलार्म नंबर भी बनाया गया है।

ट्रेन में किसी तरह का ज्वलनशील पदार्थ होने पर कोई भी यात्री उस नंबर पर मैसेज कर सकता है। इससे स्टेशन आते ही विभागीय अधिकारी या पुलिस उस आदमी को पकड़ सकते हैं। इतने महत्व का नंबर होने के बावजूद उसे सार्वजनिक अभी तक नहीं किया गया है। इस नंबर का उपयोग करके भी ट्रेनों को आग से बचाया जा सकता है।

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