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मृत्यु भोज खाकर 200 बीमार, गांव में हाहाकार

आगरा, वरिष्ठ संवाददाता। मलपुरा के गांव खेड़ा भगौर में शुक्रवार सुबह हाहाकार मच गया। 8 जनवरी को हुए त्रयोदशी संस्कार में मृत्यु भोज खाने के बाद गांव में लोग धीरे-धीरे बीमार होने लगे। सुबह तक हालात इतने बिगड़े कि बीमार लोगों की संख्या 200 से भी अधिक हो गई। सूचना पर प्रशासन में हड़कंप मच गया।

जिले की सभी सीएचसी से एंबुलेंस भेजकर लगभग 60 मरीज जिला अस्पताल भेजे गए। डॉक्टरों की टीम ने कैंप कर कई लोगों को गांव में ही उपचार दिया। वहीं कुछ लोग निजी अस्पतालों चले गए। गांव खेड़ा भगौर निवासी नत्थीलाल, विरजो और सत्ता के पिता माता प्रसाद की मृत्यु हो गई थी। 8 जनवरी को उनका त्रयोदशी संस्कार था। परिवार के लोगों ने गांव में मृत्यु भोज का आयोजन किया था। पूरे गांव का न्योता दिया गया। भोज में मालपुआ और खीर बनाई गई थी।

भोज दोपहर से देर रात तक चला था। गांव के अधिकांश घर के लिए भी खाना ले गए थे। अगले दिन बचा हुआ भोजन गांव में वितरित भी किया गया। बताते हैं इसे खाने के बाद गुरुवार सुबह से लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी। उस समय कोई भी कुछ समझ नहीं पाया। बच्चों, जवान सहित लगभग 50 लोग अकोला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और वहां से दवा लेकर घर लौट आए। कुछ लोगों को सीएचसी पर भर्ती कर रात में ही डिस्चार्ज कर दिया गया था।

गुरुवार को भी कई लोगों ने बचे हुए खाने को खा लिया। इधर, गुरुवार देर रात के बाद गांव में अचानक स्थिति बिगड़नी शुरू हो गई। लगातार भोज का खाना खाने से गांव के अधिकांश घरों में चीखपुकार मचनी शुरू हो गई। उल्टी, दस्त और पेट की शिकायतों को लेकर लोगों घरों के बाहर दौड़ने लगे। सुबह होते-होते हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए। बीमार लोगों की संख्या 200 से अधिक पहुंच गई। हालात बिगड़ने पर गांव के लोगों ने प्रशासन को सूचना दी।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सीएमओ ने जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से गांव में एंबुलेंस भेजीं। तब तक कई लोग मरीजों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच चुके थे। कुछ लोग निजी अस्पताल चले गए। ग्राम प्रधान बने सिंह ने एंबुलेंस से लगभग 60 मरीजों को जिला अस्पताल भिजवाया।

एक साथ इतने मरीज आने पर जिला अस्पताल में तत्काल दो महिला वार्ड खाली कराए गए। सभी मरीजों का तुरंत उपचार शुरू किया गया। इनमें लगभग 20 मरीजों को कुछ देर भर्ती करने के बाद दवाएं देकर डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि अन्य मरीज अभी अस्पताल में भर्ती हैं।

देर रात छह और मरीज जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक खाना दूषित था, इस कारण लोग बीमार हुए हैं। हर घर में बचे हुए खाने को गांव में ही नष्ट करा दिया गया। दौड़ी टीमें, घरों में ही किया उपचारगांव खेड़ा भगौर में एक साथ कई लोग बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव को दौड़ लीं। सीएमओ कार्यालय से डॉक्टरों की एक टीम गांव के लिए सुबह रवाना की गई, जबकि दूसरी टीम अकोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से भेजी गई।

डॉक्टरों की टीमों ने गांव में ही लोगों का चेकअप कर उपचार दिया। कई ग्रामीणों को दवाएं वितरित की गईं, वहीं कई को जरूरत पड़ने पर घरों में ही ड्रिप लगाई। गांव के लगभग 30 लोग निजी अस्पतालो में उपचार पा रहे हैं। कई घरों में पूरा का पूरा परिवार बीमारमृत्यु भोज के मालपुआ कई घरों को इस कदर जख्म दे गए कि उनमें पूरा का पूरा परिवार बीमार होकर अस्पताल पहुंच गया। गांव के भगवान सिंह के परिवार में पत्नी, बच्चों सहित आठ लोग हैं।

सभी ने मृत्यु भोज में मालपुआ खाए थे, इसके बाद घर में लाकर भी उन्हें खाया। इस कारण पूरा का पूरा परिवार बीमार हो गया। घर में कोई भी एक दूसरे को पानी पिलाने की स्थिति में नहीं था। ऐसी ही स्थिति प्रह्लाद सिंह के परिवार की थी। ऐसे में गांव में अन्य घरों के लोगों मददगार बनकर खड़े हुए।

ये लोग हुए बीमारगांव में राममोहन के परिवार में पत्नी मंजू हर्षिता, मनीषा, पूनम, हरेश और जगवीर, सीओडी कर्मचारी रामप्रकाश के यहां राजवती, शीतल, यशपाल, सोनू, सपना, सर्वेश, मुख्तार सिंह के यहां फूलवती, तेजवीर सिंह, सरवन, रवि, रूपेश, वमिलेश, खड़ग सिंह के पूजा, रूबी, सूरज, महावीर के मनीष, प्रदीप, बच्चू सिंह के कुन्ती, भीम अर्जुन संजय प्रशान्त प्रिया, परशुराम के यहां अमरवती, अपूर्वा, पायल निखिल लोहरे, रमेश के यहां हरिओमख् मीरा, पवन, मनीष, श्रीकृष्ण ममता, मायाराम के यहां सोनू, वीरू, वीकेश, नीतू, वासुमती, महावीर सुनीता, योगेश प्रदीप मनीष समेत 60 फीसदी लोग बीमार है।

वहीं जिला अस्पताल में रज्जो, कमलेश, राखी, वमिलेश, सुनीता, ममता, आशा, नीतू, कमलेश, वमिलेश, शकुन्तला, प्रवीन, वासमती, रामश्री, विरमा, रजनी, ममता, जल सिंह, शिशूपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, भगवान सिंह, वीरू, प्रदीप आदि भर्ती हैं। सीएमओ को नहीं लगी गांव जाने की जरूरतगांव में दूषित खाने से 200 से अधिक लोग बीमार होने पर हाहाकार मचा हुआ था। जिला प्रशासन ने सीएमओ को व्यवस्था संभालने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सीएमओ डॉ. एके कुलश्रेष्ठ ने गांव पहुंचकर लोगों का हाल जानने की जरूरत नहीं समझी।

बस दो टीमों को गांव के लिए भेज दिया और फोन से ही खर खबर लेते रहे। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि मैं जिला अस्पताल में जाकर मरीजों को देख आया हूं। समय पर चेतते तो नहीं बिगड़ते हालातसात जनवरी को मृत्यु भोज खाने के बाद से ही लोग बीमार होने लगे थे। गुरुवार को दिनभर अकोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 40 से 50 मरीज इसी शिकायत को लेकर पहुंचे, मगर उन्हें वहीं उपचार देकर लौटा दिया गया था।

इस बारे में सीएचसी अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने जिला मुख्यालय पर भी जानकारी नहीं दी। अगर गुरुवार को ही स्वास्थ्य विभाग इस स्थिति पर चेत जाता तो शुक्रवार को इस कदर हालात न बिगड़ते। सीएमओ डॉ. एके कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उन्हें सुबह ही जानकारी मिली, इस पर टीम को गांव में भेज दिया गया। विधायक ने जाना मरीजों का हालविधायक कालीचरन सुमन शुक्रवार शाम को गांव में मरीजों का हाल जानने पहुंचे। इसके बाद वे जिला अस्पताल आए।

रात में मरीजों के पास चिकित्सक न होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। विधायक का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग हालात बिगड़ने के बाद भी लापरवाही कर रहा है। कड़ाके की सर्दी में मरीजों को हल्के कंबल दिए गए हैं। वहीं इतने अधिक डॉक्टर होने पर भी सिर्फ दो डॉक्टर ही इमरजेंसी में हैं। उन्होंने सीएमओ से वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया। वहीं अन्य प्रतिनिधि भी गांव में मरीजों का हाल जानने पहुंचे।

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