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मुख्यमंत्री के गांव में डेढ़ साल से डॉक्टर नहीं

श्रीनगर। हमारे संवाददाता। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पैतृक गांव बुघाणी के सरकारी अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में एक फार्मासिस्ट तैनात है लेकिन वह मरीजों को एंटीबॉयोटिक दवाएं नहीं दे सकता। इसलिए गांव के लोग सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए श्रीनगर के अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं। दस साल पहले खोला गया था अस्पताल मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पैतृक गांव बुघाणी में दस साल पहले राजकीय एलोपैथिक अस्पताल खोला गया था।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार के स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने 29 मार्च, 2004 को इस अस्पताल का उदघाटन किया था। उद्घाटन के बाद अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ की तैनाती की गई थी। इस कारण गांव के लोगों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन डेढ़ साल पहले यहां तैनात डॉक्टर का तबादला कर दिया गया। इसके बाद यहां दूसरा डॉक्टर नहीं भेजा गया। अस्पताल में फार्मासिस्ट है लेकिन वह मरीजों को एंटीबॉयोटिक दवाइयां नहीं दे पा रही है। डॉक्टर नहीं होने के कारण अस्पताल में उपलब्ध कई दवाएं एक्सपायर हो गई हैं।

सर्दी-जुकाम की दवा के लिए बीस किमी का चक्करबुघाणी निवासी प्रमोद उनियाल, सुलोचना देवी, सविता देवी, लक्ष्मी देवी, कुसुम देवी, सुभाष बहुगुणा ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के कारण गांव वालों को बुखार, पेट दर्द, सर्दी, जुकाम, उल्टी-दस्त, चोट इत्यादि की दवा के लिए 20 किमी दूर श्रीनगर के अस्पताल जाना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से गांव में डॉक्अर तैनात करने की मांग की है। खंडहर में तब्दील हुआ अस्पतालगांव के किनारे बने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण यह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

अस्पताल की छत पर सड़क की दीवार टूट कर गिरी है। अस्पताल की खिड़कियां टूट गई हैं। चारों तरफ गंदगी का आलम है। शुक्रवार को श्रीनगर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी से जब डॉक्टर की तैनाती के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में डॉक्टरों की कमी है। सरकार डॉक्टरा का इंतजाम करने में जुटी हुई है। पौड़ी जिले में डाक्टरों के 191 पदों में से केवल 28 ही डॉक्टर ही तैनात हैं। ऐसी स्थिति में अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चलना कठिन हो रहा है। फार्मोसिस्टों से काम चलाया जा रहा है। एके सिंह, सीएमओ पौड़ी।

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