DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भ्रष्टाचार पर स्टिंग

इसमें कोई शक नहीं है कि आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। यह लोकप्रियता परंपरागत राजनीतिक पार्टियों के तौर-तरीकों से आम लोगों की असहमति को दर्शाती है, जिनके लिए ‘आप’ एक ताजा हवा के झोंके की तरह है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में ‘आप’ की सफलता ने उसकी लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया है। लेकिन ‘आप’ अब सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला संगठन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पार्टी है, जिसकी दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्य में सरकार है, इसलिए इसे ज्यादा गहराई से परखा जाएगा और परखने की कसौटी इसके कार्यक्रम, इसकी नीतियां और इसका प्रशासन होगा। जाहिर है, आप का सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार-विरोध है, इसलिए उसकी सरकार के लिए मुख्य कार्यक्रम सरकारी राजकाज में भ्रष्टाचार खत्म करना होगा। लेकिन उसके कुछ तौर-तरीके निश्चित ही कई सवाल उठाते हैं। इनमें से एक सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए आम नागरिकों को प्रोत्साहित करना है। इसके पीछे उद्देश्य कितना ही अच्छा क्यों न हो, लेकिन यह तरीका क्या किसी सरकार को अपनाना चाहिए? स्टिंग ऑपरेशन आधुनिक तकनीक और मीडिया का एक दिलचस्प और सनसनीखेज रूप है, लेकिन अब भी इसकी नैतिकता संदेह से परे नहीं है। स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल कितना सच को सामने लाने के लिए होता है और कितना ब्लैक मेल के लिए, यह सवाल भले ही अलग हो, लेकिन विचारणीय तो है ही।

अगर स्टिंग ऑपरेशन किया ही जाता है, तो वह निहायत जिम्मेदार व विश्वसनीय व्यक्तियों या संस्था द्वारा किया जाए, यह जरूरी होता है। एक संदेहास्पद स्टिंग ऑपरेशन के शिकार ‘आप’ के ही कुछ महत्वपूर्ण नेता दिल्ली विधानसभा चुनावों के ठीक पहले हुए थे। इस खतरनाक और नैतिक रूप से संदेहास्पद हथियार को आम हथियार बनाकर ‘आप’ की सरकार शायद आग से खेल रही है। केजरीवाल का तर्क यह है कि अगर इस तरीके से 10-15 लोग भी पकड़ में आ गए, तो भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों में डर बैठ जाएगा और भ्रष्टाचार तेजी से कम हो जाएगा। यह सदिच्छा वास्तविक रूप ले सके, तो बहुत अच्छा है, मगर इसमें सरकारी कर्मचारियों पर अवैध दबाव या ब्लैक मेल और सरकारी कामकाज के बुरी तरह शिथिल पड़ने का खतरा भी है।

‘आप’ के लोक-लुभावन और सनसनीखेज तरीकों का अपना महत्व है और उनकी वजह से लोग इस पार्टी की ओर खिंचे भी हैं, लेकिन अगर सचमुच भ्रष्टाचार खत्म करना है, तो स्टिंग ऑपरेशन से ज्यादा गंभीर तरीकों की जरूरत है। भ्रष्टाचारियों को जेल में ठूंस देने से भ्रष्टाचार का अंत नहीं हो सकता, क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें सरकारी प्रक्रियाओं में हैं। ये प्रक्रियाएं इतनी जटिल और लंबी बना दी गई हैं कि उनमें कदम-कदम पर रोड़े अटकाने और घूसखोरी करने की गुंजाइश है। सरकारी कर्मचारी भी उसी वर्ग से आते हैं, जिससे ‘आप’ पार्टी के ज्यादातर समर्थक आते हैं, वे कोई फिल्मी खलनायक नहीं हैं। अगर ये प्रक्रियाएं तेज और सरल कर दी जाएं और अड़ंगे लगाने की गुंजाइश कम कर दी जाए, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो जाएगी। बहुत सारी चीजें राज्य सरकार के अधिकारों के दायरे में नहीं आतीं, लेकिन वह अपने स्तर पर भी कई प्रशासनिक सुधार कर सकती है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता को शामिल करना सचमुच महत्वपूर्ण कदम है और ‘आप’ ने इस दिशा में बहुत काम किया है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं तय करना जरूरी है। सरकार अपने भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाए, इसी से स्थायी इलाज संभव होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भ्रष्टाचार पर स्टिंग