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कायम है सुरों के सरताज पंचम दा का जादू

महान संगीतकार व गायक राहुल देव बर्मन की गुरुवार 27 जून को 6वीं जयंती मनाई जाएगी। ‘चिंगारी कोई भड़के’, ‘रात कली एक ख्वाब में आई’, ‘पिया तू अब तो आ जा’, ‘दम मारो दम’, ‘फूलों का तारों का’, ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’, ‘महबूबा महबूबा ओ महबूबा’ जसे सदाबहार गीत हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को देने वाले बर्मन पंचम दा और आरडी बर्मन नाम से विशेष रूप से चर्चित रहे। अपने जमाने के महान संगीतकार और गायक सचिन देव बर्मन के बेटे और पाश्र्वगायिका आशा भोंसले के दूसरे पति बर्मन के गीत हमेशा जीवंत, रंगीले और मजेदार धुनों वाले होते थे। वे बास गायन शैली के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते थे। उनके बेहतरीन गानों के लिए आज भी भारतीय सिनेमा जगत उन्हें याद करता है। उनके कई गाने आज भी श्रोताओं के दिल को छू लेने की काबिलियत रखते हैं। पंचम दा ने कैरियर की शुरुआत अपने पिता के सहायक के रूप में की थी। नौ साल की उम्र में ही उन्होंने अपना पहला गीत ‘अए मेरी टोपी पलट के आ’ तैयार किया था, जिसे सचिन देव ने अपनी फिल्म ‘फंटूस’ में लिया भी था। बचपन में ही पंचम दा ने चर्चित गीत ‘सिर जो तेरा चकराए’ तैयार कर लिया था। यही नहीं बालकाल में ही उन्होंने माउथ ऑर्गन (मुंह से बजाने वाला वाद्य यंत्र) से ‘है अपना दिल तो आवारा’ गीत भी तैयार कर दिया था। इसे बजाने में तो उन्हें मास्टरी हासिल थी। सन 1में फिल्म ‘छोटे नवाब’ से उन्होंने स्वतंत्र संगीतकार के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। तीन दशकों में ही पंचम दा ने हिंदी सहित बंगाली, तमिल, तेलुगू, उड़िया, और मराठी की लगभग 331 फिल्मों और चार एलबमों के लिए संगीत तैयार किया। पंचम दा ने ‘भूत बंगला’ और ‘प्यार का मौसम’ जसी फिल्मों में अभिनय भी किया। चार जनवरी 1ो उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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