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भारतीय राजनयिक अभय की कविता में दक्षेस गान!

भारतीय राजनयिक अभय की कविता में दक्षेस गान!

भारतीय राजनयिक अभय कुमार की लिखी 'पृथ्वी गान' शीर्षक कविता का यूनेस्को पूरी दुनिया में प्रसार कर सकता है। हाल ही में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) सचिवालय में हुई एक बैठक में इस कविता में दक्षेस गान तलाशने के लिए चर्चा शुरू हो गई।

दक्षेस के विभिन्न विभागों के प्रमुख और सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस कविता को दक्षेस गान के रूप में अपनाने के गुण-दोषों पर विचार कर रहे हैं। दक्षेस ने फरवरी में माले में होने वाले दक्षेस मंत्री परिषद की बैठक इस पर एक सलाह भेजने का भी विचार किया है।

यदि इसे मंजूर कर लिया जाता है तो यहां होने वाले 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है, जिसकी तिथि अभी तक तय नहीं हुई है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक इस कविता को अपनाने पर विचार करने के लिए दक्षेस सांस्कृतिक केंद्र में भी भेजा गया है।

कविता सभी को पसंद आ रही है और विचार चल रहा है कि इसे अपनाया कैसे जाए। एक अन्य राजनयिक सूत्र ने कहा कि साधारण राय यह है कि इस विचार को स्थायी समिति और मंत्री परिषद के पास मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद दक्षेस सचिवालय, सभी सदस्य देशों के लिए प्रविष्टि भेजने के लिए खुली प्रतियोगिता की घोषणा करेगा। उनके मुताबिक उनमें से एक को दक्षेस गान के लिए चुना जा सकता है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव अभय कुमार की कविता में हिंदुस्तानी, अंग्रेजी, नेपाली, बांग्ला, पस्तो, उर्दू, सिन्हाली, जोंगखा और धीवेही भाषाओं की पंक्तियां शामिल की गई हैं। ये भाषाएं दक्षेस के आठ सदस्य देशों में बोली जाती हैं।

कविता का कुछ अंश इस प्रकार है: हिमालय से हिंद तक, नगा हिल्स से हिंदूकुश/महावली से गंगा तक, सिंधु से ब्रह्मपुत्र/लक्षद्वीप, अंडमान, एवरेस्ट, एडम्स पीक/ काबुल से थिंपू तक, माले से काठमांडू/दिल्ली से ढाका, कोलंबो, इस्लामाबाद/हर कदम साथ-साथ।

यहां दूतावास में प्रथम सचिव (प्रेस, सूचना और संस्कृति) कुमार ने दिसंबर में कहा था कि मैं समझता हूं कि दक्षिण एशियाई देशों द्वारा समान रूप से गाया जा सकने वाला दक्षेस गान एक गहरी दक्षिण एशियाई भावना और भाईचारे के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। उन्होंने कहा कि पृथ्वी गान लिखने के बाद उन्होंने सोचा कि कुछ ऐसा ही दक्षेस के लिए भी किया जाए।

पृथ्वी गान का लोकार्पण पिछले साल जून में कानून मंत्री कपिल सिब्बल और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री शशि थरूर ने नई दिल्ली के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में किया था। इसके बाद काठमांडू में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल ने यूनेस्को के नेपाल में प्रतिनिधि एक्सेल प्लेथ की मौजूदगी में इसे जारी किया था। अभय के मुताबिक इसके बाद से पृथ्वी गान का दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

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