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जोड़ों में दर्द का अचूक उपाय, आसन और प्राणायाम

जोड़ों में दर्द का अचूक उपाय, आसन और प्राणायाम

इस समय ठंड अपने चरम पर है। कोहरा, धुंध तथा शीतलहर ने ठंड के कहर को बहुत बढ़ा दिया है। यह मौसम जोड़ों की समस्या तथा ऑर्थराइटिस रोग से त्रस्त लोगों के लिए बहुत मुसीबत भरा होता है। ऐसे में इससे बचाव के लिए कुछ यौगिक क्रियाएं जरूरी हो जाती हैं।

सर्दियों के इस मौसम में कुछ समस्याएं अधिक परेशान करने लगती हैं। इनमें एक जोड़ों का दर्द भी है। लेकिन यौगिक क्रियाओं का नियमित अभ्यास कर जोडमें की गंभीर समस्या से दूर रहा जा सकता है। जो इस समस्या से ग्रस्त हैं, उन्हें यौगिक क्रियाओं के नियमित अभ्यास करने से चमत्कारिक लाभ मिलता है। 

सूक्ष्म आसन
जोड़ों की गंभीर समस्या से ग्रस्त लोगों को प्रारम्भ में कठिन आसनों का अभ्यास न कर केवल सूक्ष्म आसन का अभ्यास करना चाहिए। वह आसन शरीर के प्रत्येक अंगों जैसे-गर्दन, हाथ, पैर, रीढ़ का अलग-अलग होता है। आसन सर्वप्रथम गर्दन से प्रारम्भ करना चाहिए।

कैसे करें आसन
सीधे बैठकर सिर को दांये-बांये, अगल-बगल, आगे तथा पीछे की ओर 6-5 बार घुमाएं। इसके पश्चात गर्दन को घड़ी की सुई की दिशा तथा विपरीत दिशा में घुमाएं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस तथा चक्कर आने की समस्या से ग्रस्त लोगों को सिर को आगे की ओर नहीं झुकाना चाहिए।

इसके पश्चात, पैर की उंगलियों को आगे तथा पीछे की ओर 5-5 बार ले आएं। फिर पूरे पंजे को आगे तथा पीछे की ओर दबाएं। अंत में दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर दोनों तलवों को आगे की ओर जमीन पर रखें। इसके बाद घुटनों को ऊपर तथा नीचे की ओर करते हुए तितली आसन करें।

तितली आसन की अभ्यास विधि
दोनों हाथों को सामने सीने की ओर फैलाएं। मुट्ठियों को जोर से बंद कर दबाव के साथ खोलें। हथेलियों को सामने की ओर तथा अन्दर की ओर दबाएं। अंत में, मुट्ठियों को बंद कर कलाइयों को घड़ी की सुई की दिशा तथा विपरीत दिशा में घुमाएं। खड़े होकर दोनों हाथों को (या एक-एक कर) वृत्ताकार दोनों दिशाओं में घुमाएं। अंत में हाथों को कंधे के बराबर अगल-बगल उठाएं। अब दोनों हाथों को कुहनियों से मोड़कर हथेलियों को कंधों पर रखें। इसके पश्चात कंधों को घड़ी की सुई तथा विपरीत दिशा में घुमाएं।

आसन
गंभीर रोगियों को सूक्ष्म आसनों का प्रारम्भ में कुछ दिनों तक अभ्यास करना चाहिए। जब जोड़ अच्छी तरह खुल जाएं तथा दर्द अपेक्षाकृत कम हो जाए तो जानु शिरासन, पश्चिमोत्तासन, पवनमुक्तासन, ताड़ासन, गोमुखासन, त्रिकोणासन, अर्धशलभासन, धनुरासन आदि का अपनी क्षमतानुसार अभ्यास करना चाहिए।

पवनमुक्तासन की अभ्यास विधि
पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दाएं पैर को घुटने से मोड़कर इसके घुटने को दोनों हाथों से पकड़ कर अन्दर छाती के पास लाएं। तत्पश्चात सिर को जमीन से ऊपर उठाकर नाक तथा घुटने को एक-दूसरे से स्पर्श करने का प्रयास करें। इस स्थिति में थोड़ी देर रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया बाएं पैर से भी करें। अन्त में दोनों पैरों से एक साथ भी करें। यह पवनमुक्तासन की एक आवृत्ति है। प्रारम्भ में इसकी तीन आवृत्तियों का अभ्यास करें। धीरे-धीरे आवृत्तियों की संख्या 10 तक ले जाएं।

सीमाएं
घुटने की तीव्र समस्या से ग्रस्त लोग पवनमुक्तासन के अभ्यास में हाथ घुटने के ऊपर न रखकर अन्दर रखें। सर्वाइकल के रोगी पवनमुक्तासन के अभ्यास में सिर न उठाएं।

प्राणायाम
जोड़ों की समस्या से ग्रस्त लोगों को योग्य मार्गदर्शन में कपालभाति, भस्त्रिका, अग्निसार या सूर्य भेदी प्राणायामों में से किसी एक का अवश्य अभ्यास करना चाहिए। साथ में नाड़ीशोधन का अभ्यास 5 से 10 मिनट तक अवश्य करना चाहिए।

आहार
इस मौसम में खान-पान में कुछ सावधानी बरतनी चाहिए। गरिष्ठ, तला, भुना, मिर्च-मसालेदार पकवान, शराब तथा धूम्रपान के सेवन से परहेज करें। हरी सब्जियां, गाजर, आंवला (थोडम 1/4), सारे मीठे मौसमी फल तथा सलाद (थोड़ी मात्रा में) एवं साबुत अनाज का भरपूर सेवन करना चाहिए।

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