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देवयानी पर चलेगा केस, भारत के लिए हुईं रवाना

देवयानी पर चलेगा केस, भारत के लिए हुईं रवाना

भारत की वरिष्ठ राजनयिक देवयानी खोबरागड़े पर शुक्रवार को वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के मामले में ग्रैंड ज्यूरी ने अभियोग लगा दिया। पूर्ण राजनयिक छूट मिलने के बाद देवयानी भारत के लिए रवाना हो चुकी हैं, लेकिन ज्यूरी का कहना है कि उनके खिलाफ आरोप बने रहेंगे।

अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा ने जिला न्यायाधीश शीरा शींडलिन को लिखे पत्र में कहा कि 39 वर्षीय खोबरागड़े के खिलाफ आरोप बने रहेंगे और यदि वह राजनयिक छूट के बिना अमेरिका आती हैं तो उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।

भरारा ने कहा कि ग्रैंड ज्यूरी ने राजनयिक पर उनकी नौकरानी संगीता रिचर्ड के वीजा आवेदन से जुड़ी वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के लिए दो मामलों में अभियोग लगाया है। भरारा ने अपने पत्र में कहा कि अभियोग के लिए अभी किसी अभियोग पत्र की जरूरत नहीं है। हम जानते हैं कि प्रतिवादी (देवयानी) को बिल्कुल हाल में राजनयिक छूट मिली है।

उन्होंने कहा कि इसलिए ये आरोप तब तक बने रहेंगे, जब तक वह अदालत में आकर इन आरोपों का सामना नहीं करतीं। फिर चाहे वह ऐसा राजनयिक छूट हटने के बाद करें या बिना छूट के अमेरिका लौटकर। इस समय और अदालत के समक्ष उनके पेश होने के समय के बीच जो अंतर होगा, उसे स्वत: ही छोड़कर चला जाएगा। ऐसा अमेरिका के तीव्र सुनवाई कानून के तहत होगा, जो प्रतिवादी के उपलब्ध होने में हो रही देरी की अवधि को छोड़ने की अनुमति देता है।

भारत वापसी के लिए विमान में सवार होते समय खोबरागड़े ने कहा कि मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और आधारहीन हैं। मैं इनके गलत साबित होने की उम्मीद करूंगी। देवयानी ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि इस प्रकरण से उनके परिवार पर कोई स्थायी असर न पड़े। यहां खास तौर पर इशारा उनके बच्चों की ओर था, जो अभी भी अमेरिका में ही हैं।

देवयानी को इंडिया-यूएस हैडक्वार्टर्स एग्रीमेंट के तहत 8 जनवरी को पूर्ण राजनयिक छूट प्रदान की गई थी। नौ जनवरी को अमेरिका ने भारत से अनुरोध किया कि वह खोबरागड़े की राजनयिक छूट खत्म कर दे, लेकिन भारत ने इस अनुरोध को मानने से इंकार कर दिया। वर्ष 1999 बैच की विदेश सेवा अधिकारी देवयानी को अपनी नौकरानी के वीजा आवेदन में झूठी घोषणाएं करने के आरोप में 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 2.5 लाख डॉलर के मुचलके पर रिहा किया गया था।

राजनयिक की कपड़े उतरवाकर तलाशी ली गई थी और उन्हें अपराधियों के साथ बंद रखा गया था। उनके साथ इस तरह के व्यवहार के चलते दोनों देशों के बीच तल्खी पैदा हो गई थी। इसके जवाब में भारत ने अमेरिकी राजनयिकों के विशेषाधिकारों में कटौती कर दी थी।

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