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कर्ज नहीं लेने पर वित्त आयोग ने जताई आपत्ति

रांची। ब्यूरो प्रमुख। वित्त आयोग ने इस बात पर सबसे अधिक आपत्ति जताई कि झारखंड सरकार विकास कार्यो के लिए कर्ज लेने में कंजूसी बरतती है। सरकार हर साल जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) का तीन प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है। झारखंड सरकार 1.5 से 2 प्रतिशत तक ही कर्ज ले पाती है। आयोग का कहना था कि दूसरे राज्य कर्ज लेकर तरक्की कर रहे हैं।

झारखंड इसमें कंजूसी बरत रहा है। सदस्यों ने कहा कि विकास के लिए कर्ज लेने की सीमा तय की गई है, जिसका उपयोग राज्य नहीं कर पा रहा है। आयोग का यह भी कहना था कि सरकार अनुदान पर ज्यादा जोर देती है। रॉयल्टी मामले में तर्क से संतुष्ट नहीं राज्यरॉयल्टी मामले में आयोग ने पल्ला झाड़ लिया है। उसके इस तर्क से राज्य सरकार संतुष्ट नहीं है कि रॉयल्टी बढ़ाने के मामले में आयोग कुछ नहीं कर सकता। अधिकारियों का कहना है कि आयोग अनुशंसा तो कर ही सकता है।

ऐसे भी राज्य ने जो पैसा मांगा है, उस बारे में भी आयोग सिर्फ अनुशंसा ही कर सकता है। कर्ज के मामलों में राज्य की स्थित बिहार 58,397 करोड़ गुजरात 1,15,648 करोड़ महाराष्ट्र 1,98,084 करोड़ पश्चिम बंगाल 1,62,740 करोड़ झारखंड 25,066 करोड़।

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