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झारखंड ने दावेदारी में बिहार को पीछे छोड़ा

रांची। अवधेश कुमार सिंह। झारखंड सरकार ने 14वें वित्त आयोग से आर्थिक सहायता मांगने में बिहार को पीछे छोड़ दिया है। दो दिन पहले वित्त आयोग की टीम बिहार गई थी। बिहार सरकार ने आयोग से अगले पांच वर्षो के लिए 63,433 करोड़ की आर्थिक सहायता मांगीं है, वहीं झारखंड ने 1,42,098 करोड़ का दावा ठोका है। आयोग ने झारखंड सरकार की मांग को अव्यावहारिक ठहराया है, जिसकी कई वजह हैं। वित्त आयोग किसी भी राज्य के लिए सहायता अनुदान निर्धारित करने से पहले उसे कई कसौटियों पर तौलती है।

केन्द्र और राज्य का वित्त साधन, केन्द्रीय करों में राज्यों की भागीदारी, राजकोषीय स्थिति, केन्द्र के सकल कर राजस्व, राज्यों के समग्र राजस्व प्राप्तियां, राज्य स्तर के सार्वजनिक उपक्रम, निजी कर राजस्व, राज्यों का व्यय, केन्द्र और राज्यों के बीच बाध्यकारी करार, कर राजस्व, कर भिन्न राजस्व, अपना कर भिन्न राजस्व, ब्याज प्राप्तियां, बजट, वेतन, पेंशन एवं सब्सिडी ढांचा का गहन वशिलेषण करती है। इसके बाद राज्यवार सहायता अनुदान को अंतिम रूप दिया जाता है। झारखंड की बिहार से तुलना करें तो यह कई मापदंडों में उससे पीछे है।

झारखंड की दावेदारी से इतना तो स्पष्ट है कि यहां के अधिकारियों ने बिना सोचे-समङो मांग पत्र तैयार कर दिया है। यही स्थिति बजट की तैयारी में देखने को मिलता है। योजनावार दस प्रतिशत राशि बढ़ाकर एक सप्ताह में बजट तैयार कर दिया जाता है। केन्द्र का पैसा खर्च नहीं करने के लिए झारखंड पहले से बदनाम है। 13वें वित्त आयोग ने जो पैसा कर्णाकित किया था, उसका शत-प्रतिशत लाभ उठाने में झारखंड विफल रहा है।

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