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सरकार बच्चों के अधिकारों पर दे विशेष ध्यान: चटर्जी

रांची। संवाददाता। देश के 80 लाख बच्चों स्कूल नहीं जा पाते। पांच साल से कम आयु के करीब 50 प्रतिशत बच्चों के स्वास्थ्य की अनदेखी की जाती है। लाखों बच्चों हर साल बीमारियों के कारण दम तोड़ दते हैं। यह बातें क्राई इस्ट रिजनल के कार्यक्रम प्रमुख महुआ चटर्जी ने कही।

वह गुरुवार को होटल ग्रीन पार्क में संवाददाताओं से बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि देश में लोकसभा का चुनाव होनेवाला है, ऐसे में संस्था चाहती है कि देश की राजनीतिक पार्टियां और सत्ता में बैठी सरकार बच्चों के अधिकारों खासकर शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे।

चाइल्ड राइट्स कैंपेन बच्चों के जीवन में बदलाव के लिए और राजनीतिक वातावरण बनाने के लिए पूरे देश में वोट फॉर चाइल्ड राइट्स कैंपेन शुरू किया गया है। झारखंड में भी इसकी शुरुआत करते हुए क्राई ने दस सूत्री बाल अधिकार घोषणापत्र जारी किया।

इसमें राष्ट्रीय बाल नीति 2013 के अनुरूप बच्चों की आयु सीमा 18 वर्ष को स्वीकार करते हुए बच्चों से संबंधित सभी कानूनों के प्रावधानों में समान उम्र सीमा निर्धारित करने, बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को जीने के मौलिक अधिकार के साथ जोड़ते हुए शिक्षा अधिकार अधिनियम में संशोधन, अधिनियम में 14-18 आयुवर्ग के बच्चों के अधिकारों को सुनशि्चित करने, समेकित बाल विकास योजना के क्रियान्वयन को मजबूत बनाने, बाल मृत्यु दर और 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कुपोषण से मुक्ति, पूर्ण टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और बाल सुरक्षा के लिए पर्याप्त निवेश करने के साथ कई मुद्दे शामिल है।

कार्यक्रम में उपस्थित क्राई के इस्ट रिजनल डायरेक्टर अतिन्द्रनाथ दास ने कहा कि यह घोषणा पत्र देशभर के 18 राज्यों में किये गए अध्ययन और वशि्लेषण के आधार पर है। ऐसोसिएट जनरल मैनेजर सुशांतो चक्रवर्ती ने राजनीतिक दलों से इन विषयों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की अपील की। मौके पर प्रोग्राम मैनेजर अभिजीत मुखर्जी, राज्यभर के 18 जिलों में बाल अधिकार के मुद्दों पर कार्य करने वाली एजेंसियां और संस्था के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

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