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कांग्रेस-राजद गठबंधन के आसार बढ़े

पटना। विशेष प्रतिनिधि। खरमास खत्म होने के दिन करीब आने के साथ राजनीतिक सक्रियता बढ़ने लगी है। गठबंधनों और जोड़-तोड़ की मुहिम पर लगे ग्रहण का पटाक्षेप होना है। बीते तीन दिनों में दिल्ली के घटनाक्रमों से कांग्रेस के राजद से गठबंधन के आसार बढ़ गए हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने तीन दिन पहले सोनिया गांधी से मुलाकात कर कांग्रेस से गठबंधन की पहल तेज की।

गुरुवार को वह राहुल गांधी से मिले। राहुल से उनकी मुलाकात को अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह धारणा रही है कि राहुल गांधी राजद से गठबंधन के खिलाफ हैं। राहुल गांधी के तीखे विरोध के कारण दागी सांसदों को राहत देने वाला विधेयक लाने से केन्द्र सरकार को अपने कदम पीछे करने पड़े थे। खासकर तब इस धारणा को और मजबूती मिली। उस समय लालू प्रसाद को चारा घोटाले में दोषी करार दे दिया गया था।

विधेयक नहीं आने से उनकी सांसदी चली गई। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद पटना में ऐलान किया था कि कांग्रेस, लोजपा और वामदलों को जोड़कर महागठबंधन बनाएंगे। लेकिन उसी समय खरमास भी शुरू हो गया। वामदलों ने लालू प्रसाद की परिकल्पना को पहला झटका दिया। इसके बाद बारी लोजपा की थी। उसने भी राजद से गठबंधन जारी रखने पर ना-नुकुर शुरू कर दी। इस बीच कांग्रेस ने ऐलान किया कि वह सभी 40 सीटों पर चुनाव की तैयारी कर रही है।

यानी महागठबंधन की संभावनाओं पर पानी फिरने लगा। इस बीच कांग्रेस गठबंधन को लेकर असमंजस में फंसी रही। पार्टी का एक खेमा नीतीश कुमार से गठबंधन का पैरोकार रहा है। उसका तर्क है कि नीतीश कुमार की छवि का फायदा कांग्रेस को होगा। खासकर नरेन्द्र मोदी के सवाल पर भाजपा से रिश्ता तोड़कर नीतीश कुमार ने साहसी कदम उठाया है। कांग्रेस को इसका लाभ लेना चाहिए। दूसरे खेमे का तर्क है कि जदयू के अलग होने से बिहार में एनडीए कमजोर पड़ गया है।

ऐसी स्थिति में यूपीए वन को फिर से आकार देकर बदली स्थिति का लाभ लिया जा सकता है। लेकिन खरामास खत्म होने के दिन करीब आने के साथ राजद के कांग्रेस से गठबंधन पर लगा ग्रहण भी छंटता नजर आ रहा है। मंगलवार को लालू प्रसाद की सोनिया गांधी से और गुरुवार को राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस- राजद गठबंधन की संभावना प्रबल हो गई है। राहुल से मुलाकात के बाद लालू प्रसाद ने एक बार फिर दोहराया कि सेक्यूलर दलों को साम्प्रदायिकता के खिलाफ गोलबंद करेंगे।

उनके अंदाज से भी कांग्रेस के सकारात्मक रुख के संकेत मिल रहे हैं। बहरहाल, लोजपा से राजद के रिश्तों को लेकर असमंजस कायम है। वैसे उसके सुर भी बदले हैं। बुधवार को पार्टी संसदीय दल के अध्यक्ष चिराग पासवान ने किसी नए गठबंधन की संभावना को खारिज किया। साथ ही कहा कि इस सवाल पर फैसला फरवरी में होगा।

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