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छात्रों पर धारा 307 लगाने का कोई आधार नहीं

भागलपुर, वरीय संवाददाता। वकीलों का मानना है कि पुलिस ने छात्रों के विरुद्ध जो धाराएं दी हैं वह सही नहीं है। जिस तरह की घटना हुई है उससे छात्रों के विरुद्ध हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता है। पुलिस ने जानबूझ कर छात्रों के विरुद्ध धारा 307 लगाया है ताकि वे अधिक दिनों तक जेल में बंद रहें।

धारा लगाने वाले पुलिस पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। अधविक्ता कौशल किशोर पांडेय ने कहा कि भागलपुर पुलिस ओम बाबा हत्याकांड के दो फरारी बिल्डरों को नहीं पकड़ पाई है। अवैध शराब निर्माण के मामले में विधायक अजय मंडल के पिता को बचाने का हर कोशशि कर रही है। लेकिन निर्दोष छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस से जो चाहा वही धारा जोड़ दिया। उसने छात्रों को जेल में अपराधियों के साथ रहने को मजबूर किया है।

मानो छात्रों को अपराधी बनाने की पुलिस ट्रेनिंग दे रही है। अधविक्ता मो. इस्माईल खां ने कहा कि जिस तरह से पुलिस ने छात्रों के विरुद्ध 307 धारा को लगाया है। इससे साबित होता है कि भागलपुर की पुलिस कुछ भी कर सकती है। छात्र अपनी मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे। कुछ पथराव किया है लेकिन किसी की हत्या करने का प्रयास नहीं किया गया है। पुलिस बताये कि किस पुलिस पदाधिकारी को गंभीर चोट लगी थी। पुलिस ने अपने अधिकार का दुरूपयोग किया है।

अधविक्ता प्रकाश चन्द्र घोष ने कहा कि धारा 307 तभी लग सकता है जब किसी पर हत्या करने की नीयत से लगातार तेज हथियार से हमला किया गया हो। महत्वपूर्ण अंगों जैसे सर, गर्दन, आंख, चेहरा आदि पर गंभीर चोट पहुंचाया जाता है और जिससे जान जा सकती है वैसी स्थिति में इस धारा को लगाया जा सकता है। लेकिन छात्रों द्वारा इस तरह का कुछ नहीं किया गया है। अधविक्ता रतन कुमार झा ने कहा कि पुलिस ने धारा 307 का दुरूपयोग किया है।

पुलिस चाहती थी कि छात्र अधिक दिनों तक जेल में रहें और उन्हें जमानत मिलने में परेशानी हो इसलिए इस धारा को जोड़ दिया गया। प्राथमिकी देखने से लगता है कि पुलिस को कानून की जानकारी नहीं है।

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