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लोहिया संस्थान से वापस भेजे जा रहे मरीज

 लखनऊ निज संवाददाता

बाराबंकी के रहने वाले उम्मेद सिंह को दिल का दौरा पड़ा। परिवारीजन उन्हें लेकर लोहिया संस्थान पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने परिवारीजनों को मरीज को केजीएमयू के लारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिवारीजनों ने मरीज को लोहिया संस्थान में ही भर्ती करने की गुजारशि की लेकिन डाक्टरों ने इसे ठुकरा दिया। लाचार परिवारीजन मरीज को लेकर लारी रवाना हो गए।

ठंड के इस मौसम में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सीने में दर्द या दिल के दौरे के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे रोगियों के लिए लोहिया संस्थान में बना कार्डियोलाजी विभाग सफेद हाथी साबित हो रहा है। संस्थान में दिल के मरीजों की भर्ती अघोषित रूप से बंद है। संस्थान पहुंचने वाले मरीजों को डाक्टर दूसरे अस्पताल की राह दिखा दे रहें हैं। संस्थान के सीवीटीएस में वार्ड तो 20 बेड का बना है।

मगर मरीज भर्ती हैं सिर्फ दो। इन रोगियों के लिए वार्ड में अत्याधुनिक उपकरणों के साथ डाक्टरों की लंबी जमात और सहायक स्टाफ भी मौजूद है। जिनके ऊपर काम का कोई बोझ नहीं। इतना ही नहीं पिछले एक हफ्ते तो वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं थे। विभागाध्यक्ष डॉ. एसएस राजपूत का कहना है कि वर्तमान में एनेस्थेसिया विभाग के कई डाक्टर अवकाश पर हैं। इसकी वजह से आपरेशन नहीं हो सकते। इसके अलावा बीपीएल कार्ड धारक के लिए आया धन बीते माह तक उपलब्ध नहीं था।

जिसकी वजह से ऐसे रोगियों को भी इलाज नहीं मिल पाता था जिससे मरीजों की संख्या घटी है। वहीं दूसरी तरफ केजीएमयू के लारी में मरीजों की भरमार लगी है। रोजाना करीब तीन सौ से चार सौ मरीज ओपीडी में आ रहें हैं। लारी में कुल 130 बेड हैं जिनमे सीटीवीएस में 60 बेड है। अस्पताल में एक भी बेड खाली नहीं हैं। बिस्तरों की कमी के चलते यहां रोगियों को स्ट्रेचर तक पर भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है।

सीएमएस डॉ.एसएन शंखवार इसके लिए लारी अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और सहायक स्टाफ को श्रेय दे रहें हैं। उन्होंने साफ कहा कि मरीजों का भरोसा केजीएमयू पर बढ़ा है।

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