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यात्रियों ने सुनाई खौफ की दास्तां

 देहरादून बांद्रा एक्सप्रेस गुरुवार रात दस बजे दून पहुंच गई। हादसे के वक्त ट्रेन में सवार यात्रियों ने दून पहुंच खौफ की दास्तां सुनाई। यात्रियों का कहना है कि रेलवे ने न सिर्फ पहले गौरेगांव स्टेशन पर धुंआ उठने की सूचना को हल्के में लिया बल्कि बाद में राहत का काम भी काफी देरी से शुरू हुआ। दुर्घटनाग्रस्त दून एक्सप्रेस ट्रेन अपने तय समय समय से करीब साढेम् चार घंटे की देरी से गुरुवार रात दस बजकर पांच मिनट पर दून स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर पहुंची।

दून पहुंचते पहुंचते ट्रेन काफी हद तक खाली हो चुकी थी। ट्रेन में ऐसे तीन यात्री मिले जो बांद्रा से देहरादून तक इसी ट्रेन में रहे, और जो हादसे के चश्मदीद गवाह हैं। इन लोगों ने मीडियाकर्मियों को आंखों देखी बयां की। मारुति नाईककोल्हापुर महाराष्ट्र के मारुति नाईक, गढ़ी कैंट स्थित सैना की टुकड़ी में कार्यरत हैं। एस -1 कोच में मौजूद मारुति ने बताया कि लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं, किसी ने बताया कि पागल महिला ने आग लगाई है लेकिन केाई शार्ट सर्किट की वजह से आग लगने की बात कर रहा है।

उन्होंने बताया कि राहत भी हादसे के करीब आधे घंटे बाद मिली। हादसे के बाद वो करीब चालीस घंटे तक इसी ट्रेन में सफर करते रहे, लेकिन हर वक्त मौत का साया आस पास मंडराता नजर आया। रमाशंकर जाघवकोल्हापुर निवासी जाघव भी मारुति नाईक के साथ एक ही कोच में सवार थे। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद अचानक चारों तरफ अफरातफरी मच गई। कई लोग खुद ही ट्रेन से कूद गए, कितने लोग मरे कहना मुश्किल है। घायलों की संख्या भी काफी अधिक होगी।

जाघव ने बताया कि रेलवे प्रशासन ने पूरे रास्ते में कहीं कोई सुध नहीं ली। एक मात्र वडोदरा स्टेशन पर रेलवे अधिकारी हाल चाल लेने आए थे। इतने बड़े हादसे पर रेलवे प्रशासन ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। दून स्टेशन पर बेरुखी हादसे का शिकार बनी ट्रेन दून स्टेशन पहुंची तो यहां भी रेलवे प्रशासन के बेरुखी देखने को मिली। कोई भी अधिकारी यात्रियों का हाल चाल लेने के लिए प्लेटफार्म पर तक नहीं आया। इससे पहले दून स्टेशन पर स्थापित हेल्प लाइन पर भी ऐसा हाल देखने को मिला था।

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