DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्ट्रेचिंग व्यायाम की पहली सीढ़ी

व्यायाम से पहले और बाद में विशेषज्ञ स्ट्रेचिंग की सलाह देते हैं। स्ट्रेचिंग के लाभ केवल नियमित व्यायाम करने वालों को ही नहीं, बल्कि उनको भी मिल सकते हैं, जो नियमित व्यायाम से तो दूर रहते हैं, लेकिन मांसपेशियों को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में हल्की वर्जिश करते हैं। स्ट्रेचिंग कब, कैसे और कितनी करनी चाहिए, इसके फायदे और तरीकों के बारे में बता रहे हैं संदीप जोशी

हम सब सुनते आए हैं कि सेहत को दुरुस्त रखने के लिए स्ट्रेचिंग बहुत कारगर होती है। दरअसल हल्का-फुल्का व्यायाम यूं भी खासा लाभकारी होता है। स्ट्रेचिंग का अतिरिक्त लाभ यह है कि इससे शरीर की नसों में आई जकड़न दूर होती है, जो कई कारणों से हो सकती है; खुद भारी व्यायाम से भी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब हम व्यायाम करते हैं, चाहे वह दौड़ना हो, वजन उठाना या कोई खेल खेलना, हमारी नसें एक ही काम को करते हुए संकुचित हो जाती हैं। समय के साथ-साथ संकुचित हुई इन नसों के कमजोर हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने या उनके आसपास के क्षेत्र पर सीमित गतिविधि के कारण जोर पड़ने पर नसें चोटिल हो जाती हैं। इस बारे में उदाहरण लें किसी लंबी दौड़ के धावक का, जो कई किलोमीटर तक एक ही रफ्तार में दौड़ता है। इस क्रिया में उसके जोड़ों की बड़ी भूमिका होती है। दौड़ते समय उसकी टांगों की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और अंतत: यह मांसपेशियां धावक की प्राकृतिक चाल का विकल्प प्रदान करती हैं। इससे उसके जोड़ों पर अतिरिक्त जोर पड़ता है और आखिरकार घुटने, कूल्हे या एड़ी में दर्द शुरू हो जाता है।

इसी तरह दफ्तरों में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठ कर काम करने वाले लोग भी होते हैं, जिनके सीने की मांसपेशियों पर विपरीत असर पड़ता है। यह सच है कि मानव शरीर जरूरत के अनुसार खुद को ढालता है, परंतु यदि उसे किसी दोहराऊ प्रक्रिया से देर तक गुजरना पड़ता है तो उसकी मांसपेशियां विद्रोह पर उतर आती हैं। इसलिए यदि आप स्ट्रेचिंग से परहेज करते हैं तो भारी व्यायाम से भी दूर ही रहना चाहिए।

क्यों जरूरी है स्ट्रेचिंग करना?
स्ट्रेचिंग को नजरअंदाज करते हुए भी साधारण जीवन जिया जा सकता है, लेकिन यह आराम कुछ ही देर का मेहमान होता है। दफ्तरी कर्मचारियों के जीवन में यदि व्यायाम की जगह नहीं होती तो वह कुछ ही समय बाद दर्द के शिकार बनते हैं। दिन भर कुर्सी पर बैठने का पहला असर पीठ की मांसपेशियों पर पड़ता है। लिहाजा, दफ्तरों में कंप्यूटर के सामने घंटों बैठने वालों के लिए बेहद जरूरी है कि वे कुछ स्ट्रेचिंग जरूर करें।

विधि और फायदे
बेशक आप कामकाजी हैं, लेकिन अपनी सेहत का ध्यान रखना भी आपका फर्ज है। दिन भर कुर्सी पर बैठने की नीरसता को अलस्सुबह या शाम को, यानी अपनी सहूलियत के अनुसार, हल्के-फुल्के व्यायाम से दूर किया जा सकता है। स्ट्रेचिंग से आपकी अपीयरेंस, फ्लैक्सिबिलिटी, सेहत और समग्र कार्यशैली में सुधार आ सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप 5 से 10 मिनट तक एलिप्टिकल मशीन, स्पॉट साइकिल या ट्रैडमिल पर वॉर्म-अप करें। यदि आपका वर्कआउट टाइम इजाजत दे तो कुछ तेज रफ्तार पर करीब बीस मिनट तक कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज करें। इसके बाद, अगले 5-10 मिनट हल्का व्यायाम। धीरे-धीरे वॉर्म-अप हो जाने के बाद अब मांसपेशियों को स्ट्रेच करें। अन्य फायदों के साथ स्ट्रेचिंग मांसपेशियों को पुष्ट बनाती है। बैठने की गलत मुद्रा से पीठ आदि में होने वाली दिक्कतें भी इससे दूर होती हैं। हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग भी कार्य क्षमता और चाल-ढाल में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

फ्लैक्सिबिलिटी एक्सरसाइज ओवरयूज इंजरीज (देर तक काम करने के कारण होने वाला नुकसान) से भी बचाती हैं। स्ट्रैचिंग से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, जिससे दर्द रुकता है, चोट आदि जल्दी भरती हैं और मांसपेशियों का बेहतर विकास होता है। छोटी उम्र में किया गया व्यायाम बड़ी आयु में फायदा देता है। इससे रक्तप्रवाह, श्वास और न्यूरोमस्कुलर तंत्र आदि स्वस्थ रहते हैं। इतने लाभ यदि दस मिनट के व्यायाम से मिल सकें तो किसी भी हालत में यह घाटे का सौदा नहीं हो सकता।
      
अधिकांश लोग स्टेचिंग को वॉर्म-अप से पहले की कार्रवाई समझते हैं - ऐसा हल्का व्यायाम, जिसे वह मुख्य व्यायाम से पहले करते हैं। वॉर्म-अप के लिए आपके शरीर में रक्त प्रवाह तेज करने और गर्मी लाने की जरूरत होती है। साथ ही, वॉर्म-अप से जोड़ व मांसपेशियां कुछ हल्की भी पड़नी चाहिए, जिससे हाथ-पैर खुल कर चल सकें, और व्यायाम की शुरुआत में ही किसी किस्म की चोट लगने का खतरा न रहे। इसलिए वॉर्म-अप के लिए हल्का जॉग या दस मिनट तक तेज चलना ठीक रहेगा या फिर झुक कर पंजों को छूना, स्ट्रेट लैग मार्च जैसे व्यायाम आदि भी ठीक रहते हैं। दूसरी ओर, व्यायाम के बाद स्टेटिक स्ट्रेचेज करना भी ठीक रहता है। इससे व्यायाम सत्र के बाद सख्त मुद्रा में आ चुकी मांसपेशियों को आराम मिलता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्ट्रेचिंग व्यायाम की पहली सीढ़ी