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आत्मनियंत्रण का कमाल

जीवन में सफलता हासिल करने के लिए जिस मूलमंत्र की आवश्यकता होती है, वह है दृढ़ इच्छाशक्ति। लेकिन इच्छाशक्ति का एक अभिन्न और जीवंत सहयोगी है आत्म-नियंत्रण, यदि इन दोनों में तालमेल कर लिया जाए, तो असंभव को भी संभव में बदला जा सकता है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध स्वास्थ्य मनोविज्ञानी केल्लि मेगोनिगल ने अपनी चर्चित पुस्तक द विलपावर इन्सटिंक्ट में बताया है कि किस प्रकार आत्म-नियंत्रण और इच्छाशक्ति के सहयोग से हम जीवन में कुछ भी पा सकते हैं। उन्होंने जीवन संघर्ष से जूझते असंख्य विद्यार्थियों के मनोभावों पर कई वर्षों तक शोध कर अपने विश्वविद्यालय में ‘दि साइन्स ऑफ विल पावर’ नामक पाठय़क्रम ही प्रारंभ कर दिया है।

इच्छाशक्ति और आत्म-नियंत्रण शारीरिक गुण मात्र नहीं, बल्कि हमारे मस्तिष्क और शरीर की एक रचनात्मक प्रतिक्रिया हैं। जो लोग ध्यान केंद्रित कर अपने भावों और कार्यों पर नियंत्रण करते हैं, वे अधिक सुखी, स्वस्थ व मधुर संबंध विकसित करने के साथ-साथ अधिक धन कमाने वाले भी होते हैं। यह सीमित संसाधन है, इसका असीमित दोहन और उपयोग शरीर व मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकता है, जबकि इच्छाशक्ति का सही दिशा में किया गया उपयोग जीवन-लक्ष्य को प्राप्त करने में संजीवनी का कार्य कर सकता है। विल पावर रिडिस्कवरिंग दि ग्रेटेस्ट ह्यूमन स्ट्रेंथ नामक किताब में फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रमुख समाज विज्ञानी रॉय एफ. बॉमीस्यर और जाने-माने पत्रकार जॉन टियरने ने बहुत ही मनोवैज्ञानिक तरीके से इसे विश्लेषित किया है। इच्छाशक्ति की दृढ़ता के अभाव में हम संसाधनों के चलते भी जीवन के कई क्षेत्रों में हारते हैं, जबकि इसके साथ हम संसाधनों के अभाव में भी अपने जीवन लक्ष्य तक पहुंचने का नया मार्ग ढूंढ़ लेते हैं। यह शुरुआत आप कभी भी कर सकते हैं।
दिनेश चमोला ‘शैलेश’

 

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