DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ट्रेन में आग

पिछले दस दिनों में चलती ट्रेन में आग लगने की दो दुर्घटनाओं में 35 लोग मारे जा चुके हैं। 28 दिसंबर को बेंगलुरु-नांदेड़ एक्सप्रेस के एक ऐसी डिब्बे में आग लगने से 26 लोग मारे गए थे और आठ जनवरी को बांद्रा-देहरादून एक्सप्रेस के तीन सामान्य डिब्बों में आग लगने से नौ लोग मारे गए। अब इन दुर्घटनाओं की रूटीन जांच होगी और थोड़ी-बहुत कार्रवाई भी होगी, लेकिन जो बुनियादी समस्या है, वह इस सबसे नहीं हल होगी। पिछले दो साल में 65 लोग रेलगाड़ियों में लगी आग से मौत के मुंह में जा चुके हैं। यह तब है, जब रेल दुर्घटनाओं में आग का नंबर बहुत नीचे आता है। ट्रेनों के पटरी से उतरने, एक-दूसरे से टकराने की दुर्घटनाओं के मुकाबले आग से होने वाली दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों का प्रतिशत सिर्फ छह है। पर इसे हम समझ सकते हैं कि भारतीय ट्रेनों में सुरक्षा की स्थिति क्या है? भारतीय ट्रेनें दिनोंदिन ज्यादा असुविधाजनक, धीमी, अविश्वसनीय और असुरक्षित होती जा रही हैं। जब पूरी दुनिया में रेलगाड़ी का सफर ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर काम हो रहा है, तब भारत में पिछले कुछ वर्षों से हम उलटी दिशा में जा रहे हैं।

भारतीय रेलवे के साथ समस्या यह है कि पिछले दो-तीन दशकों में रेल मंत्रालय को वोट बटोरने का मंत्रालय मान लिया गया है और जो भी रेल मंत्री बने हैं, उन सबका उद्देश्य रेलवे को बेहतर बनाने की बजाय उसका राजनीतिक लाभ उठाना रहा है। इस वजह से उन्होंने रेलवे में अपने लोगों को नौकरियां और सुविधाएं देने और टिकट के दाम न बढ़ाने पर ही जोर दिया। इससे हुआ यह कि रेलवे की आय नहीं बढ़ी और खर्च बढ़ते गए। आय न बढ़ने की वजह से रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण पर ध्यान नहीं दिया जा सका। उदारीकरण के बाद जब देश के तमाम क्षेत्रों का तेजी से विकास हुआ, वह दौर रेलवे के लिए बहुत बुरा साबित हुआ और संकीर्ण राजनीतिक इस्तेमाल की वजह से रेलवे का विकास नहीं हो पाया। चूंकि सुरक्षा और संचार के आधुनिकीकरण में कोई राजनीतिक लाभ नहीं है, इसलिए जोर नई-नई ट्रेनें शुरू करने पर रहा, भले ही पटरियों के जाल का विस्तार नहीं हो पाया। इन सब वजहों से ट्रेनें देर से चलती रहीं और दुर्घटनाएं होती रहीं। ट्रेनों में आग को फैलने से रोकने के लिए रेल के डिब्बों में जो इंतजाम किए जा सकते हैं, वे लापरवाही और पैसे की कमी की वजह से नहीं किए गए, जिसका खामियाजा रेल यात्राी उठाते हैं। यह भी बताया जाता है कि रेलवे के डिब्बों को बनाने में खराब गुणवत्ता के सामान के इस्तेमाल की वजह से भी आग ज्यादा फैलने का खतरा होता है। रेलवे के डिब्बों को आग से प्रतिरोधक बनाने की टेक्नोलॉजी उपलब्ध है, जरूरत है उसे इस्तेमाल करने की।

रेलवे में गुणवत्ता और सुरक्षा की उपेक्षा की वजह से रेलवे की कार्य-संस्कृति भी प्रभावित हुई है। किसी वक्त में रेलवे कर्मचारी आम तौर पर अपने काम के प्रति मुस्तैद होते थे, अब लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी का माहौल पनप रहा है। राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से भी रेलवे की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है। पिछली ज्यादातर दुर्घटनाओं में मानवीय गलती जिम्मेदार पाई गई है। अगर अब इसे सुधारने की कोशिश शुरू की गई, तो भी स्थिति के सामान्य होने में कई साल का समय लग जाएगा। लेकिन अगर अब भी इसे सुधारने की कोशिश न की गई, तो रेलवे को इन हालात से उबारना मुश्किल हो जाएगा। रेलवे इस विशाल देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए इसे और इसके यात्रियों को खतरे में डालना अच्छी बात नहीं है।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ट्रेन में आग