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सुधार के लिए

राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से मेरी यह गुहार है कि जो आगनबाड़ी महिलाएं अपने कामकाज में ढिलाई बरतती हैं या किसी तरह का भ्रष्टाचार करती हुई पकड़ी जाती हैं, उन्हें निकालने या निलंबित करने से बेहतर होगा कि उनके काम को बदल दिया जाए। जैसे ऐसी महिलाओं को कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसी तरह के कुछ और काम होंगे, जिनके बारे में सोचा जा सकता है। इससे इन महिलाओं की रोजी-रोटी भी नहीं मरेगी और अपने किए की सजा भी मिल जाएगी। दूसरी विनती यह है कि मिड-डे मील में पके हुए भोजन की जगह उच्च स्तरीय गुणवत्ता वाली पैकेटबंद खाद्य-सामग्रियां उपलब्ध कराई जाएं। सरकारों से अनुरोध है कि वे इन सुझावों के व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करते हुए फैसला करें।
यशपाल शास्त्री, बुध बाजार, विकास नगर, नई दिल्ली

यह छात्र-धर्म नहीं
बीते दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर के बीआरए विश्वविद्यालय में छात्रों ने सरस्वती पूजा के नाम पर जबरन चंदा वसूली की। चंदा वसूले जाने के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के दौरान छात्रों ने जिस प्रकार हंगामा खड़ा किया और कुलपति आवास पर पथराव किया, उसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता। इस प्रकार की घटना वाकई छात्र जीवन और उसके नैतिक आदर्शो के प्रतिकूल है। यह भी गौरतलब है कि देवी-देवताओं की पूजा के नाम पर जबरन चंदा वसूलने में मशगूल रहने वाले इन तथाकथित छात्रों का ध्येय देवी-देवताओं की पूजा नहीं, बल्कि चंदा के नाम पर एकत्रित धन से कुछ दिनों की मौज-मस्ती है। ऐसे छात्र न तो अपनी शिक्षा के प्रति गंभीर होते हैं और न ही धर्म- अध्यात्म से उनका कोई वास्ता होता है। उनका एकमात्र मकसद गुंडागर्दी करना और समाज में अपनी हेकड़ी जमाकर अपनी कुंठाओं को अभिव्यक्त करना होता है। सच्चे एवं गंभीर छात्र अध्ययन के प्रति पूर्ण निष्ठा और गुरुजनों के प्रति आदर को मां सरस्वती की सच्ची पूजा मानते हैं।
राजीव रंजन झा, भगवानपुर, बिहार

रिश्वत का सच
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक हेल्पलाइन नंबर प्रदान कर जनता को उस पर रिश्वतखोर कर्मचारी का नाम बताने को कहा है। आखिर में भारत में कौन अपने वास्तविक आय-व्यय की सही जानकारी का ब्यौरा आयकर विभाग को सौंपता है? सबके सब एन-केन-प्रकारेण आयकर से बचना चाहते हैं। यही हाल बिक्री कर और अन्य सभी प्रकार के करों का भी है। इसलिए थोड़ी-बहुत रिश्वत देकर नागरिक करों के आतंक से बच जाते हैं। यदि केजरीवाल की धमकी से तंग आकर सभी कर्मचारी ईमानदारी पूर्वक सभी प्रकार के कर लगाना शुरू कर दें, तो यही जनता केजरीवाल के खिलाफ नारे लगाएगी। ऐसे में रिश्वत का चलन तभी रुक सकता है, जब भारतीयों को सभी प्रकार के करों से मुक्ति मिले। भले ही इसके लिए वह सब्सिडी या मुआवजा प्रणाली खत्म कर दे। एक बात और। अरविंद केजरीवाल की टोपी से प्रेरणा लेकर कई असामाजिक तत्वों ने सिर पर आम आदमी की टोपी पहन ली है और चंदे के नाम पर लूट रहे हैं। अब इस गोरखधंधे पर केजरीवाल कौन-सा नंबर देंगे?
मनोज भारतीय, विजय नगर, मेरठ

बोलने से पहले सोचें
आजकल वोट बैंक की ही राजनीति होती है। इसे धंधा बना लिया गया है। इसलिए नेता किसी भी जाति या धर्म को खुश करने के लिए किसी अन्य जाति या धर्म के खिलाफ टीका-टिप्पणी कर देते हैं। साफ है, इससे एक खास वर्ग का क्षणिक समर्थन तो मिल सकता सकता है, परंतु इससे देश का किसी भी तरह का भला नहीं हो सकता है। जो नेता आम आदमी के प्रतीक बनते हैं, उनसे यह आशा की जाती है कि वे अपनी बात बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहेंगे, इसलिए नेताओं को उनकी बात के क्या अच्छे-बुरे प्रभाव समाज पर पड़ेंगे, इसके बारे में भी सोच लेना चाहिए।
यशपाल शर्मा, दिल्ली

 

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