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हवाई अड्डे से चन्द कदम की दूरी पर होगी मेट्रो सेवा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हवाई अड्डे से चन्द कदमों की दूरी पर ही मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। राज्य सरकार हवाई अड्डे से मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर मेट्रो टर्मिनल बनवाने पर गंभीर है।

मेट्रो स्टेशन बनने के बाद मेट्रो को पकड़ने के लिए लोगों को ज्यादा दूर नहीं चलना पडेगा। एयरपोर्ट से यह दूरी पांच सौ मीटर होगी। लखनऊ मेट्रो रेल कापरेरेशन (एल एम.आर सी) जमीन के अधिग्रहण को लेकर कार्रवाई शुरू करने जा रही है। 

मेट्रो परियोजना की डीपीआर हवाई अड्डे से स्टेशन की दूरी दो सौ मीटर रखी गई थी लेकिन केन्द्रीय विभाग से मांगे गए सुझावों में इस दूरी को पांच सौ मीटर किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है।

विभाग के अनुसार हवाई अड्डे के नजदीक स्टेशन बनने पर हवाई उडानों को खतरा हो सकता है। जानकारों के अनुसार हवाई अड्डा जाने वाले मार्ग पर दांयी ओर खाली पडी भूमि पर स्टेशन बनाया जाएगा।

हवाई अड्डा परिसर में आने वाली इस भूमि का लेखा जोखा एलएएल एम आर सी कार्यालय तैयार कर रहा है। मेट्रो स्टेशन बनने के बाद हवाई अड्डा टर्मिनल से बाहर सडक पर जाने से पहले मेट्रो की सुविधा मिल सकेगी। वहीं कानपुर रोड पर 32वीं वाहिनी पीएसी कैम्पस में मेट्रो डिपो बनाने की कार्ययोजना बनकर तैयार है। 

सूत्रों की मानें तो परियोजना का शिलान्यास होने के बाद डिपो निर्माण का काम भी शुरू हो जाएगा। डिपो के लिए पीएसी कैम्पस की करीब 62 एकड़ भूमि के अतिरिक्त आसाराम आश्रम तथा वेहसा एवं चिल्लावां की भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। परियोजना के शिलान्यास को लेकर एलएम आरसी प्रबंध निदेशक राजीव अग्रवाल स्पष्ट रुप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन सूत्रों के अनुसार 26 जनवरी के पहले शिलान्यास नहीं हो सकेगा।

सूत्रों ने बताया कि वित्तीय व्यवस्था के लिए एलएम आरसीअधिकारी कागजी कार्रवाई में लगे हैं। मेट्रो के लिए टैक्‍सी व्यवस्था उपलव्ध कराने के लिए ट्रैवल एजेंसियों से आवेदन मांगे जाएंगे। नया भूमि अधिग्रहण कानून बनेगा मुसीबत एलएम आरसी ने परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तेज कर दी है। 

परियोजना के पहले चरण में नार्थ साउथ कारिडोर के लिए डिपो कानपुर रोड पर बनाया जाना प्रस्तावित है। टर्न की के तहत एजेंसी चयन किए जाने तक अन्य औपचारिकताएं पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। नार्थ साउथ कारिडोर के लिए 48 हेकटेयर तथा ईस्ट वेस्ट कारिडोर के लिए 17.36 हेकटेयर भूमि की जरुरत है। 

इसके अतिरिकत एलाईमेंट बनाए जाने के साथ स्टेशन, पार्किंग सुविधा, सब स्टेशन, कम्यूनिकेशन टावर आदि के लिए भी भूमि की जरुरत है। साथ ही रेडियो टावर, पापर्टी डेवलपमेंट, अस्थायी कंस्ट्रशन डिपो व कार्य क्षेत्र एवं डिपो तथा स्वीच ओवर रैंप आदि के लिए जमीन की जरुरत होगी। 

दोनों कारिडोर के लिए स्थायी रुप से सरकारी तथा निजी की कुल 65.36 हेकटेयर भूमि लेनी होगी जबकि अस्थायी रुप से 11.20 हेकटेयर भूमि परियोजना के लिए जरुरत होगी लेकिन जनवरी से लागू नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार ही भूमि अधिग्रहण काफी कठिन होगा। ऐसे में नए कानून के अनुसार अधिग्रहण करना एलएम आरसी के लिए नई परेशानी पैदा कर सकता है।

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  • Web Title:हवाई अड्डे से कुछ दूरी पर होगी मेट्रो सेवा