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कहीं दर्द का सबब न बन जाए ‘कुछ मीठा हो जाए’...

कहीं दर्द का सबब न बन जाए ‘कुछ मीठा हो जाए’...

घर में कोई खुशी हो या आपको किसी काम में कामयाबी मिली हो, मीठा तो बनता है। लेकिन इसी मीठे की जब आदत हो जाए तो उसके बिना सब फीका लगता है। अभी नहीं रुके तो बाद में रुकना मुश्किल हो सकता है। आइए एक नजर डालते हैं मीठा खाने की आदत की कड़वी सच्चाई पर। बता रही हैं रुचि गुप्ता

शायद ही कोई ऐसा होगा जिसे मीठा पसंद न हो। मीठा भी इतना कि उसके आगे चाशनी भी फीकी लगने लगे। चाय में जरा सा मीठा कम हो जाए तो चाय का स्वाद ही बिगड़ जाए। लेकिन हम अपनी बरसों पुरानी आदत में चीनी की मिठास के साथ मिलने वाली तमाम मुसीबतों को भूल जाते हैं। आमतौर पर हमारे घरों में मीठे से जुड़ा एक ही नुकसान बच्चों को बार-बार याद दिलाया जाता है और वह है, तुम्हारे दांत खराब हो जाएंगे। लेकिन क्या मीठे से होने वाली परेशानियां सिर्फ दांत तक ही सीमित हैं? नहीं, कतई नहीं। मीठे का अधिक सेवन करने से न सिर्फ दांत में दर्द, वजन बढ़ने के साथ-साथ और परेशानियां भी होती हैं, जिनमें सुस्ती, मूड का बदलना और हॉर्मोन्स में असंतुलन मुख्य हैं।

क्यों जरूरी है मीठा
मीठा ऊर्जा का एक अच्छा स्त्रोत है और शरीर को जितने मीठे या ग्लूकोज की जरूरत है उसकी आपूर्ति हम हमारे भोजन में शामिल कार्बोहाड्रेट्स और प्राकृतिक मीठे से पूरी कर सकते हैं और हम पूरे तौर पर शुगर-फ्री डाइट का मजा ले सकते हैं।

अब ये प्राकृतिक मीठा क्या है? तो इस बारे में क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू द वेटमॉनिटर डॉट कॉम एवं होल फूड्स इंडिया की संस्थापक इशि खोसला का कहना है, ‘फल, सूखे मेवे जैसे किशमिश, अंजीर, खजूर, काजू-बादाम, सब्जियां, अनाज और शहद प्राकृतिक मीठे के बेहतर स्त्रोत हैं। इससे आपको न सिर्फ शुगर, बल्कि विटामिन, खनिज, लवण आदि भी मिलते हैं। ’

इशि खोसला का मानना है कि बाजार में उपलब्ध फैट-फ्री या डाइट उत्पादों से बचना चाहिए, क्योंकि उनमें शुगर की मात्रा अधिक होती है। इसीलिए जो मीठे पर नियंत्रण लगाना चाहते हैं उन्हें ऐडेड शुगर और शुगर स्वीटेंड उत्पादों जैसे कि कोला और फ्रूट जूस को लेने से पहले विचार कर लेना चाहिए। अगर आपको मीठा खाना ही है तो आप गुड़-चना, तिल के लड्डू, मूंगफली, संदेश, फलों वाला दही आदि ले सकते हैं।

मीठे से खुद को कैसे रखें दूर

आदत को पहचानें: क्या वाकई आपका हाथ अक्सर घर में रखी मीठी चीजों की ओर बढ़ता है? क्या वाकई आपको ऐसा खाने की जरूरत है? या आप अपने मूड में बदलाव के चलते ऐसा कर रहे हैं? अपनी आदत और कारणों को पहचानें।

अन्य पोषक तत्वों को शामिल करें: मीठे से ध्यान हटाने और अपनी सेहत को बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि अपने खाने में अन्य पोषक तत्वों को भी शामिल करें, जिनमें विटामिन-बी, विटामिन-सी, जिंक आदि अहम हैं। ये पोषक तत्व न सिर्फ आपको सेहतमंद बनाते हैं, बल्कि मीठे की भूख को भी शांत करने में सहायक होते हैं।

थोड़ा-थोड़ा कम करें: अचानक से कभी कोई चीज बंद न करें। धीरे-धीरे खुद को मीठे से दूर करते चलें। और अगर मीठे की इच्छा बहुत तीव्र हो तो इसके प्राकृतिक स्त्रोत जैसे फल-कच्ची सब्जियां (संतरा, सेब, अनार, केला, गाजर आदि) का सेवन करें।

तनाव से बनाएं दूरी: अक्सर हम तनाव की स्थिति में कुछ भी खाना शुरू कर देते हैं। खासतौर पर मीठा। इसीलिए जरूरी है कि हम खुद को जितना मुनासिब हो सके, तनाव की स्थिति से दूर रखें और खुद से खुश रहने की कोशिश करें।

व्यायाम से मिलेगा छुटकारा: मीठा खाने से हमारे शरीर में सेरोटोनिन और डोपामिन का स्तर बढ़ता है, जिसके बाद हमारी मीठे की भूख शांत होती है। ठीक ऐसा ही व्यायाम के बाद भी होता है। इसीलिए जब-जब आप अपनी इस तीव्र इच्छा को शांत करना चाहते हैं तो अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल कर लें।

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