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कैमरों के जरिये गिने जाएंगे बाघ

कैमरों के जरिये गिने जाएंगे बाघ

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने उत्तराखंड में बाघों की गणना को हरी झंडी दे दी है। इस बार बाघों की गणना के लिए जिम कार्बेट और राजाजी पार्क में 350 कैमरे लगाएं जाएंगे।

इस बार कैमरों की मदद से होने वाली गणना से साल के अंत तक पता चल जाएगा कि उत्तराखंड में कितने बाघ (टाइगर) हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने गणना को मंजूरी दे दी है। अभी तक फुटप्रिंट (पग मार्क) के जरिये बाघों की गणना होती थी।

फॉरेस्ट गार्ड प्रत्येक बीट में तीन से पांच बार पद चिह्न, मल, जमीन व पेड़ पर खरोंच, गंध, प्रत्यक्ष देखना, दहाड़ और शिकार की आधार पर गणना करते थे। लेकिन अब कार्बेट, राजाजी पार्क और राज्य के ऐसे रिजर्व फॉरेस्ट जहां बाघ होने के प्रमाण मिलते रहे हैं, वहां रास्तों पर दोनों तरफ 350 कैमरे लगेंगे। कार्बेट के उप निदेशक साकेत बड़ोला के मुताबिक प्रत्येक बाघ के शरीर की धारियां अलग होती हैं। इन्हीं से गणना में मदद होगी।

बाघ संरक्षण में कार्बेट का कीर्तिमान
भारतीय वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार कार्बेट पार्क में 8.5 वर्ग किलोमीटर में एक बाघ पाया जाता है। देश के आठ फीसदी बाघ उत्तराखंड में हैं।

अवैध शिकार भी तेजी से बढ़ा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघ के खाल, नाखून और हड्डियों की भारी मांग है। इसके के चलते वर्ष 2011 में 11 और 2012 में 25 बाघों का शिकार किया गया। दिसंबर, 2013 में कार्बेट और राजाजी में तीन बाघों के शिकार की घटनाएं सामने आई थीं।
 
226 बाघ मिले थे वर्ष 2010 में
164 थी बाघों की संख्या 2008 में
241 बाघ पाए गए थे। वर्ष 2005 में

वर्ष 2011 में 1706 बाघ मौजूद थे
257
मध्य प्रदेश
300 कर्नाटक
227 उत्तराखंड
169 महाराष्ट्र
72आंध्र प्रदेश
71 केरल
143 असम
163 तमिलनाडु
36 राजस्थान

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