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आदमखोर ने किया चौथा शिकार

आदमखोर ने किया चौथा शिकार

ग्रामीणों हमला कर रहे आदमखोर बाघ ने बुधवार को एक महिला को अपना निवाला बना लिया। एक पखवाड़े के दौरान बाघ का यह चौथा शिकार है।

ठाकुरद्वारा थानाक्षेत्र के दरियापुर रफतपुर गांव में बाघ ने महिला दुलारी पर उस वक्त हमला किया जब वह बेटी राखी के साथ खेत में गन्ना काट रही थी। दुलारी से कुछ दूर पर खड़ी राखी चीखते हुए मदद के लिए दौड़ी। शोर सुनकर पास के खेत में काम कर रहे लोग वहां पहुंचे, लेकिन तब तक बाघ दुलारी को मारकर शव कोजंगल में ले जा चुका था।

ग्रामीणों के साथ बाघ के निशानों का पीछा कर रही विशेषज्ञों की टीम भी कुछ ही देर में वहां पहुंच गई और कांबिंग शुरू कर दी। काफी देर बाद जंगल में बाघ द्वारा शरीर के आगे का हिस्सा खाया हुआ शव मिला। घटना से नाराज ग्रामीणों ने शव को रखकर जाम लगाया। बाद में अफसरों के बाघ को मारने और मुआवजे के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए।

बूढ़े बाघ बन जाते हैं आदमखोर
वन्य जीव विशेषज्ञ और राज्य के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी डॉं. श्रीकांत चंदोला का कहना है कि इलाके से खदेड़े जाने पर अक्सर बूढ़े बाघ आबादी की तरफ चले जाते हैं। आबादी वाले क्षेत्र में इंसान उसका सॉफ्ट टॉरगेट बनते हैं। इंसान का खून मुंह में लगने के बाद ऐसे बाघ नरभक्षी हो जाते हैं।

ऐसे पकड़े जाते हैं नरभक्षी बाघ
बाघ के नरभक्षी होने पर उसे पकड़ने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की अनुमति जरूरी है। बाघ को पकड़ने के लिए जंगल में भैंस के बच्चे (पंडा) को पिंजरे में बांधते हैं। पिंजरों को हरी खास से ढक दिया जाता है। भैंस के बच्चे की की आवाज सुनकर बाघ पिंजरे में घुस जाता है और फिर उसमें कैद हो जाता है। ऐसे बाघ को बेहोश करने के बाद वन कर्मचारी जंगल में छोड़ देते हैं।

प्रोजेक्ट टाइगर
बंगाल टाइगर की घटती संख्या को रोकने और इनकी संख्या को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई थी। इसके अलावा बाघों के लिए जंगलों को बचाना भी इसकी प्रमुख वजह थी। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब दो लाख गांवों को जंगलों से बाहर बसाने का काम किया गया। बाघों को शिकारियों से बचाने के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स भी बनाई गई।

केनाइन डिस्टेंपर वायरस इंफेक्शन से पीडित बाघ
मुरादाबाद, माधव शर्मा
मुरादाबाद मंडल में पिछले 12 दिनों से चार लोगों की जान लेने वाला बाघ कुत्ते के दांत में पलने वाले वायरस केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से प्रभावित लग रहा है। पानी से फैलने वाली इस बीमारी से प्रभावित जानवर रिहायशी इलाकों में रहना पसंद करता है। वह फिर जंगल की ओर जाने से हिचकता है।

रामनगर के मोहान वन क्षेत्र में बतौर वाइल्ड लाइफ वार्डन तैनात रहे ईश्वर चंद्र रस्तोगी ने वर्ष 1982 में नरभक्षी घोषित हो चुकीं वसंती और मोहिनी नाम की शेरनियों को जिंदा पकड़ा था। ईश्वर के मुताबिक यह बाघ सीडीवी से पीडित लग रहा है। अनुमान है कि इस बाघ ने कहीं से सीडीवी से प्रभावित पानी पी लिया होगा। ये है
सीडीवी: केनाइन डिस्टेंपर वायरस आईवीआरआई बरेली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एके शर्मा ने इसकी खोज की है। उनके अनुसार केनाइन टीथ में वायरस पनपता है। इस वायरस से ग्रसित कुत्ता जहां पानी पीता है, वहां पर अपना वायरस भी छोड़ देता है।

आदमखोर घोषित होगा
मुरादाबाद में चार जिंदगियों को निगल चुके बाघ को राज्य सरकार आदमखोर घोषित करने की तैयारी में है। उसे मारने के लिए शिकारियों की तलाश भी जोर पकड़ चुकी है। एक-दो दिन में आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

बाघ के अब तक शिकार

29 दिसंबर
चंदौसी के मिठनपुर में किसान पर हमला, एक की मौत, एक घायल
06 जनवरी 
छजलैट के चंगेरी गांव में गन्ना काट रहे किसान को मार डाला
07 जनवरी 
कांठ के चेंदरी अकबर में खेतों में पशु चरा रही 15 वर्षीय लड़की को मार डाला
08 जनवरी 
ठाकुरद्वारा के दरियापुर रफतपुर में गन्ना काट रही महिला को काट डाला
05 शिकारियों की टीम
उत्तराखंड और पश्चिमी शिकारियों को टीम को मौके पर भेजा गया है

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