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मनचाहे स्कूल की चाह में किराये पर लेंगे घर

नर्सरी दाखिले के लिए पंजीकरण 15 जनवरी से शुरू होगा लेकिन अभिभावकों को अभी से चिंता सताने लगी है। 32 फीसदी अभिभावक अपने नौनिहाल को सीट दिलाने के लिए मनपसंद और मशहूर स्कूलों के आसपास किराये पर घर लेने की तैयारी में हैं। एसोचैम का ताजा सर्वे इस बात की तस्दीक करता है।

दरअसल, 100 प्वाइंट के सिस्टम में सबसे अधिक प्वाइंट दूरी वर्ग के लिए है। कुल 70 प्वाइंट है। दूरी वर्ग में आठ किलोमीटर तक के स्कूल शामिल किए गए हैं। यानी जिस अभिभावक का घर जितना स्कूल के नजदीक होगा उसके बच्चे की सीट आसानी से पक्की होगी। बहरहाल, 21 फीसदी से अधिक किराये पर रहने वाले अभिभावकों ने द्वारका, वसंत कुंज, राजेंद्र नगर और रोहिणी आदि इलाकों की ओर नया घर लिया है। इसके अलावा अन्य भी नया घर तलाशने के लिए प्रॉपर्टी डीलर से लगातार संपर्क कर रहे हैं। इतना ही नहीं, 65 फीसदी का कहना है कि उनके घर के दो से तीन किलोमीटर के दायरे में बेहतर स्कूलों की कमी है।
एसोचैम के सर्वे में 32 फीसदी अभिभावकों ने भरी हामी

नेबरहुड के अधिक प्वाइंट होने के चलते नामी स्कूलों के पास शिफ्ट होना चाहते हैं
किराये पर रहने वाले 21 फीसदी से अधिक अभिभावकों ने घर बदल भी लिया है
एसोचैम के इस सर्वे में 2500 से अधिक अभिभावकों ने की शिकरत

28 फीसदी पक्ष में नहीं: दिलचस्प यह है कि 28 फीसदी ऐसे अभिभावक भी हैं जिनका कहना है कि घर बदलने से सीट पक्की नहीं होगी। यदि स्कूल दूर है तो वे बस लगवाकर अपने बच्चों को दूर भेज सकते हैं।

लोन लेने के भी इच्छुक: सर्वे के अनुसार निजी स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया बेहद महंगी है। फीस भी ज्यादा है। ऐसे में 28 फीसदी अभिभावक दाखिले और फीस के लिए लोन लेने के इच्छुक है। ये लोग वक्त रहते लोन लेने की कोशिश कर रहे हैं।

मैनेजमेंट सीट डेढ़ लाख में: हैरानी की बात यह है कि सर्वे में अभिभावकों ने स्वीकारा कि मैनेजमेंट कोटा खत्म होने के बाद भी स्कूल उन्हें मैनेजमेंट कोटे के तहत डेढ़ लाख में एक सीट देने के लिए कह रहे हैं। इस साल मैनेजमेंट कोटा समाप्त कर दिया है।

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