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फिर से गुलजार होगा ‘एमआरडीए’

मुजफ्फरपुर। कार्यालय संवाददाता। वर्षो तक भ्रष्टाचार और घोटाला के झंझावत में फंसे रहे मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार को पुनर्गठित करने की मुहिम तेज हो गई है। एमआरडीए को फिर से गुलजार करने की सरकारी कवायद के तहत बुधवार को पटना में विभागीय बैठक की गई। बैठक में चर्चा के लिए बुलाये गये मुजफ्फरपुर के नगर आयुक्त सीता चौधरी ने भी एमआरडीए को पुनर्गठित करने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

अप्रैल 2006 में सरकार ने इसे विघटित कर दिया था, जिसके बाद एमआरडीए का नगर निगम में विलय हो गया था। वर्ष 2006 में ही एमआरडीए में घोटाला के आरोप में नगिरानी में मुकदमा भी हुआ था। नगिरानी जांच में योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाया गया और सभी अभियंताओं को क्लीन चिट दे दिया गया था। पुनर्गठन की नये सिरे से हो रही कोशशि में इसे एमआरडीए को पूर्व की तरह स्वायत्त संस्था बनाया जाएगा, या फिर इसे किसी विभाग से जोड़ा जायेगा, यह अभी तय नहीं हो सका है।

पुनर्गठन की कवायद शुरू होने से एमआरडीए कर्मियों में खुशी की लहर है।

जिले भर में विकास कार्य कराता था एमआरडीए : एमआरडीए से जिले के सभी प्रखंडों में विकास योजनाओं पर काम कराया जाता था। विधायक की अनुशंसा पर निर्माण कार्य होते थे। इसका अपना बोर्ड व चेयरमैन होता था। विघटन के बाद विकास योजनाओं का कार्य एमआरडीए से बंद हो गया। नक्शा पारित करने का अधिकार भी एमआरडीए को था। नगर निगम ने भी एमआरडीए के नक्शा शाखा को जीवित रखा।

हालांकि बाद में नगर विकास एवं आवास विभाग ने नक्शा पारित करने का अधिकार वास्तुविदों को दे दिया था। जिसके बाद एमआरडीए पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका था। एमआरडीए के पुनर्गठन के मुद्दे पर बुधवार को नगर विकास एवं आवास विभाग में बैठक आयोजित की गई थी। इसमें मुझसे विचार मांगा गया तो मैंने भी पुनर्गठन पर सहमति जता दी है। अभी एमआरडीए को क्रियाशील होने में कुछ समय लगेगा। सीता चौधरी, नगर आयुक्तं।

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