DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रशिक्षण में बताए आलू बीज उत्पादन के गुर

 हाथरस। विकास खंड हाथरस के गांव नगला खुशाली में दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को आलूबीज उत्पादन की जानकारी दी गई। इसके लिए गोबर की खाद का विशेष महत्व भी बताया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा नगला खुशालीमें आलू बीज उत्पादन तकनीक विषय पर कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ.श्यामसिंह ने आलू कृषकोंको अधिक लाभ लेने के लिए आलू के बीज उत्पादन की वैज्ञानिकविधि से अवगत कराया।

डॉ.सिंह ने किसानों को बताया कबिीजोत्पादन उन खेतों में करना, जिनमें दो.तीन साल से आलूनहीं उगाया गया हो। दूसरी प्रजाति का आलू खेत से बीस मीटरदूर बोएं। बीजोत्पादन के लिए मान्य श्रोत से प्रजनक या आधार बीजही प्रयोग करें। बीज के आलू की बुआई 15 से 30 सितम्बर तककर देनी चाहिए। प्रशिक्षण में बीजोपचार के बारे में भी विस्तारसे जानकारी दी गई। इस दौरान यह भी बताया कि बीज वाली आलूकी फसल को घास, कीड़े, व बीमारी से मुक्त रखें।

अवांछनीयपौधो को निकालना रोगिंग कहलाता है। 25 दिन के बाद रोगीले वछोटे या बड़े पौधे निकालें। खुदाई के वक्त भी बीज के आलू कीफसल में काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आलू कीग्रेडिंग करने के बाद एक सप्ताह तक छाया में सुखाएं। प्रशिक्षणमें नरेन्द्र कुमार, धारासिंह प्रगतशिील किसानों का विशेषयोगदान रहा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:प्रशिक्षण में बताए आलू बीज उत्पादन के गुर