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आदमखोर टाइगर के लिए ढाल बने गन्ने के खेत

 रामपुर। हिन्दुस्तान संवाद

आदमखोर टाइगर के लिए गन्ने के खेत ढाल बने हुए हैं। तीन लोगों को नविाला बनाकर ईख में पनाह लेता है। 11 दिन से टाइगर वन विभाग की टीम के लिए चुनौती बना हुआ है। जबकि, टाइगर को बेहोशी का इंजेक्शन (ट्रंकलाइजर) लगाने वाली टीम भी कांबिग कर रही है। टाइगर इंसान से हमेशा खौफ खाता है लेकिन, एक बार उसके मुंह को आदमी का खून लग जाए तो फिर वह आदमखोर बन जाता है।

टाइगर के आदमखोर बन जाने के बाद वह अन्य वन्य जीवों के शिकार में दिलचस्पी नहीं लेता। इंसान का शिकार वह मजबूरी में करता है। फेफड़े कमजोर हो जाने, बीमार होने या फिर पेट में नासूर हो जाने और जंप करने में असहाय होने पर भी टाइगर इंसान को निशाना बनाने लगता है। दूसरी, वजह हो सकती है कि उसके इलाके में शिकार की कमी आ जाए लेकिन, इस तर्क से डीएफओ रामपुर हरेंद्र सिंह कतई सहमत नहीं है। बताते हैं कि इस समय जंगल में शिकार की कोई कमी नहीं है।

फिलहाल मुरादाबाद, अमरोहा, संभल में टाइगर की दहाड़ गूंज रही है। आदमखोर बनने की यह हो सकती हैं वजहेंफेफड़े कमजोर हो जानापेट में नासूर होने पर टाइगर जंप नहीं कर पाता बच्चों की सिक्योरिटी में भी टाइगर इंसान पर हमला बोल देता है। मुख्य कीला टूटने परपैर की कोई हड्डी फ्रेक्चर हो जाए, भागने में अक्षम होने परटाइगर की खूबी है कि वह 0 से 60 किमी की रफ्तार प्रति सेकेंड पकड़ लेता है। लेकिन, टाइगर बीमार हो जाए जैसे की उसके फेफड़ो में संक्रमण या फिर पेट में नासूर होने पर वह नरभक्षी हो जाता है।

डा. बीएम अरोरा, पूर्व वैज्ञानिक, बाघ यदि एक बार इंसान को शिकार बना लें तो उन्हें मानव से आसान शिकार कोई दूसरा नहीं लगता। बेहद कम मेहनत में वह इंसान को शिकार बना लेता है। हरेंद्र सिंह, डीएफओ, रामपुर।

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