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भागवत कथा में किया कृष्ण जन्म का वर्णन

बदायूं। हिन्दुस्तान संवाद

बिरुआवाड़ी मंदिर के गीता भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पंडित देवमणि त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का मनोहारी वर्णन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित से शुकदेव कहते हैं, कि संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते कि जब-जब धर्म की हानि होती है। तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं। इसके बाद पंडित देवमणि ने संगीतमयी चौपाइयों-जब-जब होई धर्म की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानी, तब-तब धरि प्रभु मनुज शरीरा, हरहि कृपा निज सज्जन पीरा आदि चौपाइयों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

कथावाचक ने प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जेल में वासुदेव के यहां अवतार लेकर संतो व भक्तों का सम्मान बढ़ाया। उन्होंने अपने अंदर बुराई विद्यामान न रहे इसके लिए संतों का सत्संग का मार्ग बताया। भगवान श्रीराम की मर्यादा और श्रीकृष्ण को तब समझोगे जब राम मय बनो। जब भक्ति मार्ग में भक्त लीन रहता है तब प्रभु दर्शन होते हैं। अंत में कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म लीलाओं का वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तमाम मार्मिक प्रसंग सुनाए।

जिससे स्त्रोता भावविभोर हो गए। इस मौके पर राणा प्रताप सिंह, महेश चौहान, अनूप पटेल, अनिल मौर्य, अनिल साहू, अनिरूद्व सक्सेना, संजीव गुप्ता, महीपाल सिंह पुंडीर, आदेश कुमार सिंह आदि का सहयोग रहा।

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  • Web Title:भागवत कथा में किया कृष्ण जन्म का वर्णन