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ट्रेनों में बढ़ रहे आग के हादसे,सुरक्षित नहीं सफर

आगरा, वरिष्ठ संवाददाता

कभी देहरादून एक्सप्रेस में आग तो कभी नांदेड़ एक्सप्रेस में। कभी सचखण्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लगना तो कभी श्रीधाम में लपटें दिखना। ट्रेनों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। एक तरफ यात्री ट्रेनों में लूट, चोरी डकैती की बढ़ती घटनाओं के लिए असुरक्षित महसूस करते थे, मगर अब ट्रेनों के अंदर आग जैसे हादसों की घटनाएं बढ़ने से सफर में सुरक्षा पर और भी सवाल खडेम् होने लगे हैं।

मुंबई-आगरा-दिल्ली रूट पर पिछले एक साल में तीन बड़ी घटनाओं सहित एक दर्जन आग की घटनाएं हो चुकी हैं। बुधवार सुबह मुंबई से वाया मथुरा होकर देहरादून जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस आग की लपटों का शिकार हो गई। इसमें नौ लोग की मौत हो गई। इसके बाद से ट्रेनों में बढ़ रहे हादसों की तरफ सवाल खड़ा करना लाजिमी है। हालांकि देहरादून एक्सप्रेस में अभी तक आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। लेकिन शुरुआती दौर में छोटी-छोटी चूक होने से ही इस तरह की हादसे सामने आ रहे हैं।

अगर मुंबई-आगरा-दिल्ली रूट की बात करे तो पिछले दिनों सचखण्ड एक्सप्रेस के एसी कोच में धौलपुर और आगरा कैंट स्टेशन के मध्य आग लग गई थी। इस दौरान एक यात्री इलेक्ट्रानिक पैनल बोर्ड के पास खड़ा होकर स्मोकिंग कर रहा था, जिस कारण आग लग गई। ट्रेन में भगदड़ मची। शुक्र था कि ट्रेन धौलपुर स्टेशन के पास ही थी। तत्काल ट्रेन को रोककर आग पर काबू पाया गया। मगर ट्रेन स्टेशन की परिधि से काफी दूर होती तो शायद हादसा काफी बड़ा हो सकता था।

इसी तरह लगभग चार माह पहले पलवल स्टेशन से पहले महाकौशल एक्सप्रेस के इंजन में आग लगी थी। समय रहते आग बुझा ली गई। अप्रैल-2013 में आगरा कैंट स्टेशन के पास एक संपर्कक्रांति एक्सप्रेस की एसी बोगी में एसी में आग लग गई थी। इसमें एक यात्री हल्का झुलस गया था। ट्रेन को बीच में ही रोककर आग को बुझा लिया गया था। तीन साल पहले मथुरा स्टेशन पर मथुरा-पटना एक्सप्रेस ट्रेन खड़ी थी। कुछ ही समय बाद ट्रेन को वहां से रवाना किया जाना था।

उसके छह डबि्बों में अचानक आग लग गई और लगभग दो घंटे तक आग में डबि्बे पूरी तरह स्वाहा हो गए थे। शुक्र था कि उस दौरान ट्रेन में एक भी यात्री नहीं था। इस मामले की जांच हुई, जांच में आग का कारण आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया।

----------ट्रेनों में आग की घटनाओं के प्रमुख कारण

-- ट्रेनों के एसी कोच में एसी की नियमित सर्विस न होने से स्पार्किंग की दिक्कतें होना। - ट्रेनों में एसी के पाइप लीकेज होने से स्पार्किंग होना।

- इलेक्ट्रिक पैनल बोर्ड के पास स्मोकिंग आदि करने से आग की घटनाएं होना।

अग्नशिमन उपकरण खस्ता हाल

 रेलवे द्वारा हर स्टेशन पर अग्नशिमन उपकरणों की व्यवस्था की गई है। ट्रेनों में भी फायर स्टिंगुशर आदि लगाने का प्रावधान है। मगर कई ट्रेनों में फायर स्टिंगुशर नहीं दिखते। वहीं स्टेशनों पर भी अग्नशिमन उपकरण खस्ता हाल है। वर्ष 2012 में तूफान एक्सप्रेस के इंजन में आगरा कैंट स्टेशन के आउटर में आग लगी थी। उस दौरान फायर स्टिंगुशर इस्तेमाल किए गए, मगर उनमें गैस ही नहीं थी।

बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया गया।

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