DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फसलों पर अब ठंड और पाले की मार

 लखनऊ प्रमुख संवाददाता

ठंड का असर अब फसलों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। न्यूनतम तापमान के बार-बार छह डिग्री से नीचे गिरने से दलहनी-तिलहनी फसलों में जैविक शून्यता की स्थिति आती जा रही है, जिससे पौधों के सेल नष्ट हो जाते हैं और उनका विकास रुक जाता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति कुछ दिन और बनी रही तो गेहूं की फसलों पर भी इसका कुप्रभाव पड़ना शुरू हो जाएगा।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कई दिनों से लगातार पाला पड़ा है। इससे आलू समेत दलहन-तिलहन की फसलें प्रभावित हुई हैं। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जी. एन. सिंह का कहना है कि आमतौर पर पांच डिग्री से नीचे के तापमान को जैविक शून्य (बायोलॉजिकल जीरो) की स्थिति कहा जाता है। इसमें पौधों में पोषक तत्वों के ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है और उनकी जैविक क्रियाएं थम सी जाती हैं। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. एससी मुद्गल कहते हैं कि अभी जिस तरह मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है, उससे पौधों को बचाने के लिए खेतों में नमी जरूरी है।

पूर्व कृषि निदेशक इक्ष्वाकु सिंह का कहना है कि पाले से बचाव के लिए शाम के समय खेतों में हल्की सिंचाई करनी चाहिये या खेतों के किनारों पर धुआं करना चाहिये। इससे पाले के कुप्रभाव से कुछ हद तक फसलों को बचाया जा सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फसलों पर अब ठंड और पाले की मार