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तो फिर क्यों कराई भी बीएड युवाओं को टीईटी

देहरादून। कार्यालय संवाददाता

प्रदेश के हजारों बीएड पास युवाओं को इसलिए टीईटी कराई गई थी ताकि उन्हें प्राथमिक स्कूलों में नौकरी मिल सके। बीएड वालों को प्राथमिक शिक्षा में लाने के लिए एनसीटीई ने दो बार विशेष रियायत भी दी। लेकिन अब इन युवाओं का सपना टूटने ही वाला है क्योंकि 31 मार्च के एनसीटीई की रियायत की अवधि खत्म हो जाएगी।

दरअसल बीएड की डिग्री माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक तैयार करने के लिए होती है। एनसीटीई के नए नियमों के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में बीएलएड या डीएलएड के साथ टीईटी उत्तीर्ण होना जरूरी है। उत्तराखंड सरकार ने चार साल पहले एनसीटीई को बताया था कि यहां बीएड पास युवा काफी हैं और उन्हें टीईटी के करने के बाद प्राथमिक स्कूलों में बतौर शिक्षक रखा जा सकता है। प्रदेश की स्थितियों को देखते हुए एनसीटीई ने इसकी अनुमति दी। अनुमति मिलने से बीएड युवाओं को नौकरी की उम्मीद जग गई और पहले बैच में 14 हजार ने टीईटी कर ली।

अगले सप्ताह फिर टीईटी का रिजल्ट आने जा रहा है जिसमें इससे भी ज्यादा युवा पास होने की उम्मीद है। बीएड पास युवाओं ने टीईटी सिर्फ इसलिए की थी ताकि उन्हें प्राथमिक में नौकरी मिल सके। लेकिन एनसीटीई द्वारा प्रदेश को दी गई रियायत अवधि इसी 31 मार्च को खत्म हो जाएगी। इसके बाद बीएड और टीईटी पास युवा प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त नहीं किए जा सकते। ‘आरटीई के मानकों के मुताबिक प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अभी छह हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं, फिर सरकार नियुक्तियां क्यों नहीं कर रही है।

यह बीएड पास उन युवाओं के साथ मजाक है जिन्हें प्राथमिक शिक्षक बनाने का ख्वाब दिखाकर टीईटी कराई गयी थी। ’- बलदेव सिंह भंडारी, प्रदेश अध्यक्ष बीएड प्रशिक्षित संघ‘सरकार इन युवाओं की समस्या को गंभीरता से समझ रही है और जल्द ही इसके निस्तारण के प्रयास किए जाएंगे। सरकार के प्रयास से ही पहले भी एनसीटीई ने रियायत की अवधि बढ़ाई गई थी। ’मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री।

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